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Bhiwani News: खुशबू की खेती से महकी किस्मत

Mon, 21 Oct 2024 10:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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अपने खेत में लगे फूल दिखाता बहल क्षेत्र के सिरसी गांव का किसान मनोज रंगा। 
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बहल। रेतीली जमीन पर फूलों की खेती से किसान की किस्मत महकने लगी है। राजस्थान से सटे सिरसी गांव के किसान मनोज रंगा ढाई एकड़ में फूलों की खेती कर रहे हैं। उनके नेट हाउस में खिले रंग-बिरंगे फूल दिल को सुकून तो दे ही रहे हैं, आर्थिक समृद्धि लाने में भी मददगार साबित हो रहे हैं।
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महज ढाई एकड़ जमीन के मालिक मनोज स्नातक डिग्रीधारक हैं। मनोज को जब परंपरागत खेती से आर्थिक सफलता नहीं मिली तो उन्होंने इसमें बदलाव की बात सोची। करीब तीन साल पहले उसने ढाई एकड़ में से एक एकड़ में नेट हाउस लगाया। नेट हाउस में तीन साल तक लगातार खीरे की फसल उगाई और उससे अच्छी खासी आमदनी हुई। उत्साहित मनोज ने इससे आगे बढ़कर नया प्रयोग करने की ठानी। उसने नेट हाउस में क्षेत्र में पहली बार फूलों की खेती करने की सोच बनाई। हालांकि, कुछ किसानों ने उसकी सोच पर संदेह भी किया पर मनोज ने मन में ठान ली कि वह क्षेत्र के किसानों के लिए नए रास्ते खोलने के लिए इस प्रयोग जरूर आजमाएगा। मनोज का पहला प्रयोग सफल रहा है। उसके खेत में फूलों की लहलहाती खेती को देखने दूसरे गांवों से भी किसान आ रहे हैं। संवाद
जून में लगाई थी पौध, हर महीने हो रही लाखों रुपये की आमदनी

मनोज ने बताया कि वर्ष 2023 में नेट हाउस लगाने पर उसे करीब 70 से 80 हजार रुपये का खर्चा आया था। उसने लगातार तीन फसलें खीरे की ली जिससे अच्छी आमदनी हुई। हिम्मत बढ़ी तो फूलों की खेती की सोची। इसी नेट हाउस में उसने जून 2024 में फूलों की तैयार पौधे लगाई जिस पर उसे करीब 30 हजार रुपये का खर्चा आया। अब उसे हर महीने करीब डेढ़ लाख रुपये की आमदनी हो रही है। हर महीने करीब 20 क्विंटल फूल उतर रहे हैं जो 80 से 90 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं। बीच में करीब 200 रुपये प्रति किलो तक का भाव भी मिला है। किसान मनोज रंगा ने बताया कि वह इसके लिए पूर्व मंत्री जेपी दलाल का आभारी है जिन्होंने उसकी फसल में ही नहीं, उसकी जिंदगी में बदलाव लाने का काम किया है।
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सुंदराह से लिया प्रशिक्षण, रॉयल बॉल और सुपर गेंदा की तैयार की है फसल

मनोज रंगा ने बताया कि उसको परंपरागत खेती से हटकर खेती का हौंसला पूर्व कृषि मंत्री जेपी दलाल ने दिया था। उनके प्रोत्साहन पर उन्होंने एकीकृत बागवानी विकास केंद्र, सुंदराह, महेंद्रगढ़ से प्रशिक्षण लिया और न्यू अमर किसान सेवा केंद्र महेंद्रगढ़ से इसकी पौध ली। फसल के दौरान उनको डॉ. कृष्ण यादव का मार्गदर्शन मिला, जिससे सही फसल तैयार हो सकी। किसान ने बताया कि इस फसल से एक और फायदा हुआ। खीरे की फसल के बाद जमीन में नीमा तोड़ जड़ गांठ रोग लग गया था, वो फूलों की फसल के बाद खत्म हो गया है। मनोज ने बताया कि उसने प्रयोग के तौर पर कावेरी कंपनी की रॉयल बॉल और सुपर गेंदा की फसल उगाई है। इसे वह भिवानी व दिल्ली की मार्केट में बेच रहे हैं।
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