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Bhiwani News: भिवानी-घघर और मिताथल-घुसकानी ड्रेन का बदलेगा प्रारूप

Mon, 31 Jul 2023 01:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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​​​भिवानी-घघर ड्रेन में हिसार के समीप ​स्थित गांव के पंप हाउस से छोड़ा जा रहा पानी। संवाद
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भिवानी। शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों के अलावा जिले भर के गंदे पानी की निकासी करने वाली भिवानी-घघर ड्रेन का जल्द प्रारूप बदलेगा। इसी के साथ मिताथल-घुसकानी ड्रेन को भी अपग्रेड किया जाएगा। इतना ही नहीं सीबीएलयू यूनिवर्सिटी में बन रहे डिस्पोजल और सेक्टर 13 के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का गंदा पानी भी भिवानी-घघर ड्रेन में डाला जाएगा। इसी को लेकर सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने ड्रेन की क्षमता बढ़ाने के नए डिजाइन पर काम करना भी शुरू कर दिया है। जिसका प्रारूप आईआईटी रुड़की से तैयार कराएंगे। वहीं ड्रेन को 17 किलोमीटर दायरे में पक्का भी किया जाएगा। अक्तूबर तक सिंचाई अधिकारी इस मसौदे को तैयार कर इसे सिरे चढ़ाने के लिए सरकार के समक्ष भेजेंगे। ड्रेन से जुड़े पंपिंग स्टेशनों को भी अपग्रेड किया जाएगा। इन पर भी मोटरों की क्षमता बढ़ेगी।
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भिवानी के देवसर चुंगी मैन डिस्पोजल से शुरू होकर हिसार के कंवारी गांव तक भिवानी-घघर ड्रेन का निर्माण 2008-09 में कराया गया था। इस ड्रेन की शुरुआती क्षमता 200 क्यूसेक थी। जिसकी अब शहरी दायरे और आसपास के लगातार विकसित हो रहे इलाकों में गंदे पानी की निकासी की वजह से क्षमता बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया है। भिवानी-घघर ड्रेन में फिलहाल भिवानी शहर का गंदा पानी डाला जा रहा है। इसी के साथ मिताथल-घुसकानी भी इसी ड्रेन से जुड़ी है। मिताथल-घुसकानी ड्रेन की क्षमता करीब 100 क्यूसेक है। लेकिन भिवानी-हांसी हिसार मार्ग पर गांव प्रेमनगर के समीप ड्रेन में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग करीब 70 से 80 क्यूसेक शहर का गंदा पानी भी डाल रहा है। जबकि ये ड्रेन बरसाती पानी का दबाव भी झेल रही है। जिससे इसके ओवरफ्लो होने का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि शुरूआत से ही ये ड्रेन कच्ची है। अब सीएम घोषणा के बाद भिवानी-घघर ड्रेन को बवानीखेड़ा के गांव सूई बलियाली तक करीब 17 किलोमीटर तक पक्का किया जाना है। सीबीएलयू के अंदर भी नया डिस्पोजल बन रहा है। इसे भी भिवानी-घघर ड्रेन से जोड़ा जाएगा। जिससे इस ड्रेन में अतिरिक्त गंदा पानी भी पहुंचेगा। इसी तरह शहर के सेक्टर 13 में काफी साल पहले बना सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का पानी भी गांव तिगड़ाना के आसपास ही खेतों में जमा हो रहा है। इस गंदे पानी की निकासी भी रोड क्रॉस की अनुमति के बाद भिवानी-घघर ड्रेन में ही कराई जाएगी। संवाद


ये पंपिंग स्टेशन भी होंगे अपग्रेड
मिताथल घुसकानी ड्रेन गांव मिताथल से शुरू होकर गांव बापोड़ा तक जाती है। जिसके बाद गंदे पानी को लिफ्ट कर गांव प्रेमनगर ड्रेन का गंदा पानी भी मिताथल-घुसकानी ड्रेन में डाला जाता है। फिर इस गंदे पानी को लिफ्ट कर भिवानी-घघर के जरिए हिसार तक भेजा जाता है। ड्रेन के इस सफर में कई पंपिंग स्टेशन आते हैं, जिनसे गंदा पानी लिफ्ट कर खेतों का बरसाती पानी और आबादी का गंदा पानी ड्रेन में डाला जाता है। जिनमें निगाना, सूई, भुरटाना, खानक के पास पांच-पांच एचपी क्षमता के पंपिंग स्टेशन हैं, जिन्हें भी विभाग अपग्रेड कराएगा। जिसके बाद इन पंपिंग स्टेशनों की क्षमता अतिरिक्त बारिश के पानी को सीधे ड्रेन में तेजी से डालकर ग्रामीण इलाकों को जलभराव से बचाएगी।
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सर्वेक्षण के बाद होगी ड्रेन की मिट्टी जांच
सिंचाई विभाग ड्रेन को अपग्रेड करने से पहले इसका सर्वेक्षण कराएगा और ड्रेन की मिट्टी भी जांची जाएगी। क्योंकि ये ड्रेन भिवानी से हिसार के कंवारी गांव तक जाती है। ड्रेन के कई हिस्सों की मिट्टी काफी अलग है। ये मिट्टी कई जगह कच्ची होने के बावजूद किनारों को काफी मजबूती दे रही है तो कई जगह रेतीली मिट्टी के किनारों के टूटने का खतरा भी बना रहता है। क्योंकि रेतीली मिट्टी काफी कमजोर होती है। पानी से उसके अंदर जल्द कटाव बन जाते हैं और ड्रेन में ज्यादा पानी होने की सूरत में तबाह और टूटने का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में मिट्टी की जांच के बाद ही उन इलाकों में उसके प्रबंधों को लेकर कदम उठाए जाएंगे।

भिवानी-घघर ड्रेन के साथ-साथ मिताथल-घुसकानी ड्रेन को अपग्रेड किया जाएगा। लंबे अर्से बाद इन दोनों ड्रेनों की क्षमता बढ़ाई जाएगी, जिसका ड्राफ्ट आईआईटी रुड़की से तैयार कराएंगे। सर्वे और मिट्टी जांच कार्य के बाद ड्रेन के डिजाइन पर भी काम शुरू करेंगे। जिसके बाद अक्तूबर तक यह मसौदा तैयार कर उच्चाधिकारियों के समक्ष भेजा जाएगा। ड्रेन को काफी हिस्से में पक्का किए जाना है। जिसके बाद जिले से गंदे पानी की निकासी के साथ बारिश के अतिरिक्त पानी की निकासी में दिक्कतें नहीं होंगी।
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-जितेंद्र मान, कार्यकारी अभियंता भिवानी वाटर सर्विसेज भिवानी सर्कल यमुना जल सेवाएं परिमंडल भिवानी।
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