फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bhiwani News: पहले डोडी से संतरी करते थे जगह की रखवाली, अब वहां बंदियों की मेहनत से सब्जियों की हरियाली

विज्ञापन
जिला कारागार के अंदर खाली जगह पर उगाई गई गोभी की फसल को जांचते जिला कारागार अधीक्षक सेवा सिंह व उप - फोटो : Bhiwani
विज्ञापन
भिवानी। जिला कारागार के करीब दो एकड़ खाली पड़ी जमीन में बंदियों की मेहनत से खेत में हरियाली ही हरियाली दिखाई देने लगी है। बंदियों ने जेल के अंदर आर्गेनिक सब्जियों की खेती कर एक सार्थक पहल की है। जेल में करीब फूल गोभी, पत्ता गोभी के अलावा पालक, गाजर, मूली, शलगम, धनिया और मेथी सहित सीजन में उगाई जाने वाली सभी सब्जियों की भरमार है। ये सब्जियां बंदियों की थॉली में ही परोसी जा रही हैं।
विज्ञापन

भिवानी जिला कारागार में पिछले तीन माह से बंदी आर्गेनिक खेती के हुनर को निखार रहे हैं। आर्गेनिक खेती से तैयार हुई सब्जियां भी जेल में बंदियों और कैदियों के खाने में इस्तेमाल हो रही हैं। जेल के अंदर मुख्य भवन के चारों तरफ काफी जगह खाली पड़ी हैं, जिसे पहले किसी भी कार्य में इस्तेमाल नहीं लाया जाता था। जेल प्रशासन की कोशिश से अब यही जगह सोना उगलने लगी है। क्योंकि यहां आर्गेनिक सब्जियां उगाई जा रही हैं, जिनकी अच्छी पैदावार भी मिल रही है। अब जेल प्रशासन को बाहर से महंगी सब्जियां खरीदनी नहीं पड़ती। भिवानी जिला कारागार में इस समय 977 बंदी व कैदी हैं। इनके भोजन में बड़े पैमाने पर सब्जियों की खेप इस्तेमाल होती है।
जेल प्रशासन ने ढूंढ निकाला पानी और खाद का तोड़
जिला जेल अधीक्षक सेवा सिंह व उप अधीक्षक नरेश बूरा ने जेल के अंदर बंदियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले पानी का प्रयोग इन सब्जियों में सिंचाई के लिए करने की व्यवस्था कराई। इसके लिए जेल के मुख्य भवन से नालियां खाली जगह तक पहुंचाई, जिनका पानी सीधे सब्जियों तक पहुंचने लगा। इस पानी के इस्तेमाल से सब्जियां भी फलने-फूलने लगी। वहीं सब्जियों में जीव अमृत व धन जीव अमृत विधि से खाद का इस्तेमाल किया गया। ये दोनों ही खाद देसी गाय के गोबर और मूत्र से तैयार की जाती हैं, जो कि सब्जियों को पनपने के साथ साथ उनमें कीटों के प्रभाव को भी रोकती हैं।
विज्ञापन

बिजली एवं जेल मंत्री रणजीत सिंह चौटाला व डीजीपी जेल प्रशासन मोहम्मद अकील के निर्देश पर जेल के अंदर आर्गेनिक खेती शुरू की गई है। फिलहाल 15 से 20 बंदी रोजाना सब्जियों की देखभाल कर रहे हैं। इससे जेल के अंदर ही सब्जियों की पैदावार लेना संभव हुआ है। हर माह बाहर से सब्जियों की भारी खेप मंगवानी पड़ती हैं, जिस पर राजस्व भी खर्च आता है। अब अंदर ही सब्जियां उगाकर उन्हें बंदियों के भोजन में इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे राजस्व की बचत भी हो रही है।
- सेवा सिंह, अधीक्षक जिला कारागार भिवानी।
जेल के अंदर खाली जगह पर सब्जियों के साथ-साथ औषधीय गुणों वाले पौधे भी तैयार किए जा रहे हैं। इन पौधों में आर्गेनिक खाद डाली जाती है। इससे बंदियों की कार्यकुशलता के साथ ही शारीरिक क्षमता भी बढ़ती है। दिमाग भी सही दिशा में काम करता है।
विज्ञापन

- नरेश बूरा, उप अधीक्षक जिला कारागार भिवानी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें