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Bhiwani News: पांच साल तक किसानों के मुद्दे रहे मुखर, समाधान हुआ न राहत

Tue, 17 Sep 2024 11:18 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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 खाद बिक्री केंद्र पर लगी किसानों की भीड़।
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भिवानी। पिछले पांच सालों तक किसानों के मुद्दे मुखर रहे। एमएसपी को लेकर आंदोलन किया। वहीं मंडी में फसल बिक्री को लेकर परेशानी झेली। खाद के लिए भी लंबी लाइन में लगे। लेकिन समाधान कुछ नहीं हुआ।
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भिवानी जिले में साढ़े सात लाख एकड़ से अधिक कृषि भूमि पर किसान फसल बिजाई करते हैं। ऐसे में मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर भी करीब 75 हजार से अधिक किसानों का पंजीकरण किया जाता है। लेकिन इसके बावजूद इन किसानों को फसल उत्पादन से लेकर फसल बिक्री करने तक अनेक अड़चनों का सामना करना पड़ता है। खाद-बीज से लेकर फसल में मौसम की मार भी ये किसान झेल रहे हैं।
भिवानी जिले में किसानों की मांग और मुद्दों को लेकर एक बड़ा तबका उनके समर्थन में रहा है। ऐसे में जिला मुख्यालय की मंडी सहित 11 मंडियों में किसानों की फसल खरीद की व्यवस्था हर साल विभाग करता है। मगर मुश्किल से इन मंडियों में आधे से अधिक ही किसानों की फसल खरीद पाती है, जबकि कुछ मंडियों में तो किसानों को फसल लाने से ही इन्कार कर दिया जाता है।
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खरीद में भी एक पेंच भुगतान को लेकर फंसा रहता है। फसल बेच चुके किसान महीने भर बाद भी भुगतान को लेकर आढ़तियों के चक्कर लगाते रहे हैं।
फसल बिजाई के बाद किसान को पहली जरूरत खाद की होती है। खाद समय पर नहीं मिलने से किसान को फसल उत्पादन में काफी नुकसान झेलना पड़ता है। खाद बिक्री केंद्रों पर सुबह से ही भीड़ में किसान जुट जाते हैं, लेकिन उन्हें खाद मिल जाएगी इसकी कोई गारंटी नहीं रहती। हर बार ये समस्या किसान झेलता है। इसका अधिकारी भी कोई समाधान नहीं करते।
- देवेंद्र किसान
किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती प्राकृतिक आपदा है। खाद-बीज को लेकर तो मारामारी बनी ही रहती है। मौसम की मार झेलने वाले किसानों को सरकार की तरफ से मुआवजा तक नहीं मिलता। जबकि सरकार मुआवजा घोषणा कर खूब वाहवाही लूटती है। क्योंकि जो शर्तें लागू रहती है उनमें अधिकांश को तो किसान पूरी ही नहीं कर पाता है। सरकार को चाहिए कि किसानों के लिए फसल खराबा पर मुआवजा प्रक्रिया आसान हो।
- रामकुमार किसान।
किसानों को प्राकृतिक आपदा में नुकसान भरपाई के लिए निजी बीमा कंपनियों के सहारे छोड़ दिया है। ये कंपनी अनाप-शनाप शर्तें भी किसानों पर थोप रही है। वास्तव में फसल में नुकसान होने पर भी किसान को मुआवजा मिल रहा है न राहत। ये किसान अपना नुकसान झेल अगली फसल के लिए भी ब्याज पर पैसा उठाकर फिर से बिजाई करने पर मजबूत हो जाते हैं। सरकार को चाहिए कि किसानों के लिए नीति और नियत साफ रखकर काम करे।
-छाजूराम किसान
इस समय किसानों की खाद बिक्री केंद्रों पर लंबी लाइनें लग रही हैं। अधिकारी पर्याप्त खाद होने का दावा करते हैं, लेकिन केंद्र पर कर्मचारी किसानों को खाद तक नहीं देते। किसान अपने काम धंधे छोड़कर लगातार दो से तीन दिनों तक खाद लेने के लिए ही चक्कर लगा रहे हैं। जबकि ग्राम स्तर पर किसानों को खाद और बीज जैसी सुविधाएं मुहैया कराई जाएं तो उनकी भागदौड़ और पैसा बचे।
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-ओमपाल किसान।
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