केंद्रीय विद्यालय में बच्चों को प्राकृतिक आपदा से बचाव के बारे में बताते एनडीआरएफ के अधिकारी।
भिवानी। गांव पालुवास स्थित केंद्रीय विद्यालय में मंगलवार को बठिंडा से एनडीआरएफ की 7वीं बटालियन की ओर से भूकंप की मॉक ड्रिल करवाई गई। सुबह करीब 11 बजे सायरन बजने के साथ मॉक ड्रिल शुरू हुई। भूकंप की तीव्रता 6.6 रिएक्टर मापी गई। एनडीआरएफ के बचाव दल ने केंद्रीय विद्यालय की इमारतों में फंसे घायल बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला।
भूकंप की मॉक ड्रिल के दौरान सहायक कमांडेंट देवेन्द्र सिंह के नेतृत्व में एनडीआरएफ की टीम ने भूकंप का एक तरह से वास्तविक नजारा प्रस्तुत किया। भूकंप के सायरन के साथ ही बचाव दल की टीम कक्षाओं में गई। उन्होंने बच्चों को अपने-अपने बैग सिर पर रखकर स्कूल से बाहर खुले परिसर में जाने को कहा। सभी बच्चे सुरक्षित बाहर आए। ऊपर की मंजिल पर कुछ कमरों से बच्चों को सीढ़ियों के सहारे बाहर निकाला गया। मामूली रूप से घायल कुछ बच्चों को एनडीआरएफ की टीम ने जिला पुलिस की टीम के सहयोग से स्ट्रेचर के सहारे बाहर निकाला।
जिला रेडक्राॅस वालंटियर ने प्राथमिक उपचार सहायता प्रदान की और बाद में उनको स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उपचार दिया। मॉक एक्सरसाइज में पुलिस उप निरीक्षक विशेष ने बताया कि मॉक ड्रिल लाइव देखना पूरी उम्र याद रहता है। विद्यार्थियों को बचाव के साथ-साथ प्राथमिक उपचार की भी जानकारी होनी चाहिए। इस दौरान स्कूल प्राचार्य मोहिन्द्र सिंह, आपदा प्रबंधन परियोजना अधिकारी प्रवीन कुमार, रेडक्रॉस से संजय कामरा, विकास कुमार, मनोरंजन शर्मा, डॉ. अजय कुमार, अग्निशमन से राजीव मौजूद रहे।
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ऐसे करे प्राकृतिक आपदा से बचाव
मॉक एक्सरसाइज के दौरान एनडीआरएफ सहायक कमांडेंट देवेंद्र सिंह व इंस्पेक्टर जसवंत सिंह ने विद्यार्थियों को आपदा प्रबंधन के बारे में जरूरी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भूकंप आने पर हमें सबसे पहले सुरक्षित स्थान के सहारे हमारे सिर को बचाना है। ताकि गंभीर चोट न लगे। समतल मैदान में हों तो ध्यान रखना है कि हम गिर सकते हैं। इसी प्रकार से घर में प्राथमिक उपचार ले सकते हैं, जो कि घर पर होना जरूरी है। उन्होंने बच्चों के क्लास रूम, बैडरूम व किचन में बचाव करने के बारे में जरूरी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भूकंप की स्थिति बनने पर बिजली की तारों से दूर रहें। गाड़ी न चलाएं, माचिस न जलाएं और घबराएं नहीं। जरूरत के समय प्रशासन द्वारा जारी की गई हेल्पलाइन नंबर की सहायता लें।