नागरिक अस्पताल में चिकित्सक कक्ष के बाहर लगी मरीजो का भीड़।
भिवानी। जिला नागरिक अस्पताल में मंगलवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे चिकित्सक ओपीडी बीच में छोड़कर चला गया। दरअसल हुआ यूं कि मेडिसन ओपीडी के 21 नंबर कमरे में एक महिला की चिकित्सक के साथ नोकझोंक हो गई। महिला चिकित्सक से उलझ बैठी तो वहां काफी देर तक हंगामा हुआ। जिसके बाद चिकित्सक को बीच में ही ओपीडी छोड़कर जाना पड़ा। इसके बाद घंटों तक मरीज चिकित्सक के आने का इंतजार करते रहे।
वहीं बाल रोग चिकित्सक कक्ष में भी दो बाल रोग विशेषज्ञ छुट्टी पर जाने के बाद प्रशिक्षुओं के हाथों में बाल रोगियों की कमान आ गई। मंगलवार को प्रशिक्षु ही बाल रोगियों का चेकअप कर उन्हें परामर्श देते दिखाई दिए। इन दिनों मौसम में बदलाव होने से गले के संक्रमण और बुखार से पीड़ित मरीज ज्यादा आ रहे हैं। इसमें भी छोटे बच्चे ज्यादा बीमारी की चपेट में आ रहे हैं।
भिवानी के जिला नागरिक अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब 1250 से अधिक मरीज आते हैं। इन दिनों मौसम में काफी बदलाव आ गया है। जिसका सबसे अधिक असर बुजुर्गाें और बच्चों की सेहत पर देखा जा रहा है। अधिकांश बुजुर्ग गले में संक्रमण और बुखार से पीड़ित हैं वहीं मौसम बदलने से छोटे बच्चों की सेहत भी बिगड़ रही है। बाल रोग चिकित्सा कक्ष में प्रशिक्षु ही बाल रोगियों का चेकअप करते दिखाई दिए। बताया गया कि दो बाल रोग विशेषज्ञ छुट्टी पर हैं। एक बाल रोग चिकित्सक तो पहले ही लंबी छुट्टी पर है जबकि दूसरी बाल रोग चिकित्सक मंगलवार को छुट्टी पर रही। महिलाएं छोटे बच्चों को लेकर पहुंची थी, जिनमें ज्यादातर मौसमी संक्रमण से पीड़ित दिखे। वहीं मेडिसन विभाग में तैनात चिकित्सक से महिला की नोकझोंक के बाद से काफी देर तक मरीज कक्ष के बाहर जुटे रहे। वहीं मेडिसन के वरिष्ठ चिकित्सक वार्ड से राउंड पर गए हुए थे ऐसे में काफी देर तक मरीजों को चिकित्सक के लौटने का इंतजार करना पड़ा।
ओपीडी और आपात विभाग के बाहर अवैध साइकिल स्टैंड
जिला नागरिक अस्पताल परिसर इन दिनों अवैध वाहन स्टैंड बना हुआ है। अस्पताल में आने वाले मरीजों के साथ आसपास के दुकानदार और लोग भी नागरिक अस्पताल में नो पार्किंग जोन में वाहन खड़े कर रहे हैं। नागरिक अस्पताल की ओपीडी और आपात विभाग के गेट के आगे भी वाहनों की पार्किंग की जा रही है। जिसकी वजह से मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। आपात विभाग के आगे वाहन खड़े होने से एंबुलेंस को भी रास्ता नहीं मिलता है। वहीं पीजीआई रेफर होने वाले मरीजों को ले जाने में भी एंबुलेंस को जगह नहीं मिलती।