कोर्ट ने यह भी कहा कि हर तीन माह बाद माता के नाम से खाते में जमा दान राशि को उपायुक्त भिवानी से वेरीफाई कराया जाएगा। गांव देवसर के माता दुर्गा मंदिर में हर साल करीब दस करोड़ के आने वाले चंदे को लेकर विवाद बना था। सरंपच संजय देवसरिया ने गांव के माता दुर्गा मंदिर में चढ़ावे की राशि और अखंड ज्योति जलाए जाने को लेकर शिकायत भिवानी कलेक्टर को दी थी।
सरपंच संजय देवसरिया ने शिकायत में बताया था कि गांव के माता दुर्गा मंदिर में साल में नवरात्र पर दो बार विशाल मेला लगता है। इसमें करीब आठ से दस करोड़ रुपयों का चंदा मंदिर के पुजारियों के पास आता है। जबकि ग्रामीण और मेला कमेटी निशुल्क मेले के दौरान अपनी सेवाएं देते हैं। इस चंदे पर गांव के ब्राह्मण और राजपूत के करीब सौ से डेढ़ सौ परिवार हैं। जबकि गांव का ये मंदिर पहाड़ी पर बना है और इसके आसपास की भूमि पंचायत की मलकियत में आती है।
इसी मामले में भिवानी कलेक्टर दीपक बाबूलाल करवा की कोर्ट ने फैसला देते हुए धारा 145 के तहत कुर्क करते हुए दुर्गा माता मंदिर में तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी थी। इसमें तहसीलदार, लेखा अधिकारी और बीडीपीओ को शामिल किया गया। इस कमेटी को तुरंत प्रभाव से मंदिर का चार्ज संभालने और चंदे की राशि जमा कराने के लिए अलग से बैंक खाता खुलवाने के भी आदेश दिए थे।
मंदिर के पुराने पुजारियों क तरफ से पुजारी विक्रम के अधिवक्ता डीके सिंह ने बताया कि मामला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विक्रमजीत सिंह की कोर्ट में पहुंचा। जिस पर दोनों ही पक्षों की बहस होने के बाद न्यायालय ने इसमें पुराने पुजारियों को आदेश दिए हैं कि वे माता मंदिर के नाम से बैंक में अलग से खाता खुलवाएं और उस खाते में दान व चंदे की राशि का हिसाब किताब रखेंगे। इस खाते को हर तीन माह में उपायुक्त भिवानी से वेरिफाई कराया जाएगा। उन्होंने भिवानी कलेक्टर की कोर्ट के आदेशों को भी निरस्त कर दिया। मंदिर के पुजारी विक्रम का कहना है कि माता का मंदिर करीब सात सौ साल पुराना है। इसमें उनके पूर्वज माता की सेवा करते आ रहे हैं।