देवेश कुमार ओला अपने परिजनों के साथ।
बवानीखेड़ा (भिवानी)। चंद्रयान-3 की बुधवार को सफलतापूर्वक लैंडिंग हो गई। अब रोवर चंद्रमा की सतह पर 15 दिनों तक वहां की सतह का अवलोकन कर तस्वीर भेजेगा। चंद्रयान-3 की सफलता में गांव बड़सी जाटान निवासी सीनियर साइंटिस्ट देवेश ओला की विशेष भूमिका रही। देवेश कुमार ओला ने बताया कि उन्हें बेहद खुशी है कि वे चंद्रयान-3 मिशन का हिस्सा बने। चंद्रयान-3 की सफलता से खुश हैं और उनका भविष्य में भी अनुसंधान का कार्य जारी रहेगा। चंद्रयान की लैंडिंग करने से पहले वह आत्मविश्वास से लबालब थे।
उन्होंने चंद्रयान मिशन में लैंडिंग साइट स्टेबिलिटी का कार्य किया। चंद्रयान से कैमरा इमेज लेता है, वह रॉ इमेज होती है। उसको बाद में इंप्रूव कर साइंटिस्ट देवेश ओला ने प्रस्तुत करने का कार्य किया, ताकि चंद्रमा की संरचना को समझने में मदद मिल सके। 30 वर्षीय देवेश ओला चंद्रयान-3 के सदस्य हैं और वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की टीम में सीनियर वैज्ञानिक हैं। चंद्रयान 3 की सफलता के लिए देवेश ने एक वर्ष तक टीम वर्क के रूप में कार्य किया और उनकी मेहनत रंग लाई। देवेश ने बताया कि उनका सपना डिस्टिंग्विश साइंटिस्ट बनने का है। वह देश के पूर्व राष्ट्रपति एवं सीनियर साइंटिस्ट डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम को अपना आदर्श मानते हैं और उन्हें की तरह साइंटिस्ट बनना उनका सपना है।
आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग में किया एमटेक
गांव बड़सी के सज्जन कुमार ओला व सुनीला देवी के घर पैदा हुए देवेश कुमार ओला बचपन से ही ब्रिलिएंट स्टूडेंट रहे हैं। गांव बड़सी के सज्जन कुमार ओला आर्मी के कार्यरत थे। देवेश कुमार ओला की स्कूली शिक्षा आर्मी स्कूल में हुई। इन्होंने कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग में बीटेक किया और आईआईटी हैदराबाद से आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग में एमटेक किया। इनके अंतरिक्ष और शोध क्षेत्र में रुचि होने के कारण भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा आयोजित आईसीआरबी की परीक्षा और दो तकनीकी साक्षात्कारों को उत्तीर्ण किया। देवेश कुमार ओला लगभग दो वर्ष पहले जींद की रहने वाली सॉफ्टवेयर इंजीनियर गीतांजलि संग विवाह बंधन में बंधे। जिनसे इन्हें डेढ़ वर्षीय पुत्री रुचिका है। देवेश ओला के छोटे भाई विकास ओला भी करीब एक वर्ष पहले इसरो में कार्यरत थे और उन्होंने इसरो में एक प्रोजेक्ट के ऊपर कार्य किया था।