भिवानी। करीब 115 साल पुराने बाल सेवा आश्रम की जगह कन्या गुरुकुल खोलने की तैयारी है। इसके लिए यहां रह रहे 19 बेसहारा बच्चों को दूसरों जिलों में शिफ्ट किया जाना है। इसकी भनक लगते ही निराश्रित बच्चों का आक्रोश भड़क गया। आश्रम में रहने वाले बच्चों ने प्रबंधन के खिलाफ गेट पर ही धरना देकर नारेबाजी शुरू कर दी। विरोध को शहरवासियों का भी साथ मिला। विरोध के बाद आश्रम पहुंचे विधायक घनश्याम सर्राफ, एसडीएम हरवीर सिंह व महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने बच्चों से बात की। आश्रम के बच्चों ने लिखित में अधिकारियों को शिकायत देकर उन्हें यहां प्रताड़ित किए जाने सहित प्रबंधन के कुछ पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप भी लगाए। बातचीत के बाद एसडीएम ने आरोपों की जांच कराने और बच्चों को दूसरे जगह नहीं भेजे जाने का भरोसा देकर उन्हें शांत किया।
भिवानी में महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लाला लाजपतराय ने दानवीरों के सहयोग से 30 मई 1909 को बाल सेवा आश्रम की नींव रखी थी। आश्रम करीब 16 एकड़ भूमि में है। इसमें आठ एकड़ में बच्चों के लिए आवासीय सुविधाएं हैं। फिलहाल आश्रम में 19 बच्चे हैं, जिनमें सात लड़के हैं और 12 लड़कियां हैं। इस चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूट (सीसीआई) में हिसार, महेंद्रगढ़, चरखी दादरी, सिरसा और भिवानी क्षेत्र से रेस्क्यू किए लावारिस बच्चों को रखा जाता है। इसके बंद होने के बाद रेस्क्यू किए नाबालिग बच्चों को बाल कल्याण समिति के माध्यम से करनाल, रोहतक या फिर जींद की सीसीआई में भेजा जाएगा।
हमने बच्चों से बात की है और उनकी शिकायत भी जानी है। बच्चों के स्थानांतरण की प्रक्रिया को स्थगित करा दिया है। बिना जिला प्रशासन की अनुमति के इन बच्चों को कहीं नहीं भेजा जाएगा। बच्चों को भी यहां से कहीं नहीं भेजे जाने का आश्वासन दिया गया है। बच्चों को प्रताड़ित किए जाने संबंधी मामले की भी जांच कराएंगे और इस संबंध में जो भी लोग जिम्मेदार हैं, उन पर कार्रवाई की जाएगी।
-हरबीर सिंह एसडीएम भिवानी।
लाला लाजपतराय ने बाल सेवा आश्रम की नींव रखी थी। ये समाज की धरोहर है। बच्चों के साथ गलत नहीं होने दिया जाएगा। अगर गुरुकुल बनता है तो भी बच्चों को यहां से कहीं नहीं भेजने देंगे। आश्रम के संचालन के लिए नई कमेटी का गठन किया जाएगा।
-घनश्याम सर्राफ विधायक भिवानी।
संस्था ने 2017 में संकल्प लिया था कि यहां गुरुकुल की स्थापना होगी। इसी के अनुरूप यहां गुरुकुल बनाया जा रहा है। बच्चों को नियमानुसार संबंधित जिलों की बाल कल्याण समिति के माध्यम से भेजा जाएगा। ये पूरी प्रक्रिया कानूनी तरीके से ही होगी। बच्चे यहां से नहीं जाने की जिद पर अड़े हैं। उन्हें समझाने का प्रयास करेंगे।
-वेदप्रिय आर्य, अध्यक्ष बाल सेवा आश्रम प्रबंधन कमेटी।