इसमें दो गवाहों को भी गोली मारकर मौत की नींद सुलाया जा चुका है। वर्ष 2022 में सरपंच के चुनाव हुए हैं, जिसमें जेल के अंदर बंद पूर्व सरपंच बबलू का चाचा भूप सिंह गांव का सरपंच बना है। चुनाव के कुछ दिन बाद ही बबलू के चाचा भूप सिंह के चुनाव में समर्थन करने वाले महेंद्र की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जबकि मास्टर अजीत उर्फ बालिया गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया था।
गांव बड़ेसरा निवासी बलजीत ने 2017 में गांव की सरपंच सुदेश के खिलाफ आरटीआई लगाई थी। उसमें सुदेश की दसवीं कक्षा की मार्कशीट फर्जी पाई गई थी। इसके बाद से दोनों पक्षों में रंजिश हो गई थी। इसके बाद बलजीत और उसके परिवार के पांच लोगों की हत्या की जा चुकी है। 2017 में बलजीत व उसके चाचा भल्लेराम और ताऊ महेंद्र की गोली मारकर हत्या कर दी थी। अक्तूबर 2019 में पूर्व सरपंच पवन की भी हत्या कर दी गई थी। 2020 में बलजीत के ताऊ की घर के सामने ही तीन गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
2017 में तिहरे हत्याकांड के बाद दो गवाहों की भी हत्या की गई थी। पूर्व सरपंच पवन की हत्या में गवाह सूबे सिंह की भी हत्या हुई थी। हत्याकांड के मुख्य गवाह राजकुमार पर 13 जुलाई 2021 को जानलेवा हमला हुआ था। इसके तार जेल से जुड़े थे। बाद में सोनीपत के चार बदमाशों को पुलिस ने पकड़ा तो खुलासा हुआ कि जेल में बंद पूर्व सरपंच आनंद ने जेल से ही अजय निवासी फाजिलपुर सोनीपत, दीपक उर्फ बॉक्सर निवासी देवसर, रोहित उर्फ काला निवासी फाजिलपुर सोनीपत, अमन उर्फ रसगुल्ला निवासी बंदेपुर सोनीपत को उसकी हत्या की सुपारी दी थी। बदमाशों को इसके लिए जेल में रहते हुए ही 2.73 लाख रुपए दिए गए थे।