बवानीखेड़ा में पैरोल पर आए दहेज हत्या के मामले में सजायाफ्ता ने फांसी पर लटककर जान दे दी। शव के पास से सुसाइड नोट भी मिला। सुसाइड नोट तथा परिजनों के बयान पर पुलिस ने धारा 174 की कार्रवाई शुरू कर दी है।
सोमवार को वार्ड नंबर 10 के रहने वाले 31 वर्षीय तिलकराज बबलू का शव मकान के कमरे में फांसी पर झूलता मिला। मृतक के चाचा रमेश ने बताया तिलकराज 2 दिसंबर को 21 दिन के लिए भिवानी जेल से पैरोल पर आया था। जो कि मानसिक तौर से परेशान था। सोमवार को मृतक अपने मकान में छत पर बने कमरे में सोने के लिए गया था। उसकी मां पड़ोस में गई हुई थी। घर आने के बाद खाना बनाने पर खाना खिलाने के लिए मां ने अपने पुत्र तिलक को कई आवाजें लगाई। पर कोई जबाव ना मिलने पर परिजनों ने छत पर जाकर देखा तो सीढ़ियों को दरवाजा अंदर से बंद था। जिसके परिजनों ने पड़ोसी की छत से कूद कर खोला तो तिलक अपने कमरे में गार्डर पर लगे पंखे के हुक में रस्सी से झूल रहा था। जिसके सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में ले पोस्टमार्टम के लिए भिवानी सामान्य अस्पताल ले गए।
बार-बार आती है पत्नी की याद
तिलक राज अपनी पत्नी के हत्या के आरोप जेल में गया, उसी की याद में की अपनी जीवन लीला समाप्त की। मृतक तिलकराज की शादी लगभग 11 साल रोहतक जिले के लाहली गांव में हुई थी। जिसके एक बेटी तथा एक बेटा भी है। शादी के लगभग पांच साल बाद पत्नी की मौत के आरोप में दहेज हत्या के कारण कैद हुई थी। जिसके चलते दो दिसंबर को जेल से 21 दिन की पैरोल पर घर आया था। पुलिस को मिले सुसाइड नोट में लिखा हुआ था कि वो पिछले काफी समय से मानसिक तौर से परेशान था। उसमें लिखा था कि वो अपनी पत्नी को बहुत प्यार करता था। उसे अपनी पत्नी की याद भी बार-बार आती थी। इसके अलावा मृतक ने अपने चाचा को उसके बच्चों को संभालने की बात भी कही है।