अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। लोहानी के पास स्थित पोल्ट्री फार्म के मैनेजर व उसकी पत्नी की बीती रात को सदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मैनेजर का शव कमरे में फंदे से लटका हुआ मिला तो वहीं, पत्नी का शव बेड पर। महिला की मौत जहरीले पदार्थ के सेवन से हुई है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और कमरे का दरवाजा तोड़कर शवों को कब्जे में लिया। दंपति असम के रहने वाले थे। उनके दो बच्चे थे जो उनके साथ वाले कमरे में सो रहे थे। पुलिस ने शवों का पोस्टमार्टम करवा सिविल अस्पताल के शव गृह में रखवा दिया है। वहीं, मृतक के परिजन असम से देर शाम तक भिवानी पहुंचेंगे।
जानकारी के अनुसार लोहानी के पास स्थित पोल्ट्री फार्म में असम का गांव बाहरा निवासी प्रणव पाठक मैनेजर के पद पर तैनात था। वह अपने बीवी बच्चों के साथ यहीं पर रहता था। प्रणव अपने बेटे व बेटी को साथ वाले कमरे में सुलाने के बाद अपने कमरे में सोने चला गया। सुबह जब उसने फोन नहीं उठाया तो वहां पर सिक्योरिटी गार्ड धन सिंह ने सुबह आठ बजे दरवाजा खटखटाया। दरवाजा अंदर से बंद मिला। काफी देर बाद भी दरवाजा नहीं खुला तो उसने इसकी जानकारी पोल्ट्री फार्म मालिक पोहकर सिंह को दी। सूचना मिलने पर वह मौके पर पहुंचा और पुलिस को बुलाया। पुलिस के आने के बाद जब दरवाजा तोड़ा तो सामने फंदे पर रस्सी से प्रणव का शव लटक रहा था, जबकि उसकी पत्नी ईशा का शव साथ बेड पर पड़ा था। जुई चौकी इंचार्ज एसआई रविंद्र ने बताया कि दोनों शवों का पोस्टमार्टम करवा सिविल अस्पताल के शव गृह में रखवा दिया है। साथ ही असम के उसके परिजनों को सूचना दे दी है जो देर शाम तक भिवानी पहुंचेंगे। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार ईशा की मौत जहरीला पदार्थ निगलने से हुई है और प्रणव की फंदा लगाने से। जांच के लिए विसरा सुनारियां लैब भेज दिया गया है।
चार साल से कर रहा था पोल्ट्री फार्म पर नौकरी
प्रणव चार साल पहले हीरा पोल्ट्री फार्म पर नौकरी के लिए आया था। वह यहां पर अपनी पत्नी ईशा, बेटी निहारिका (10), बेटा कृशू (7) साल के साथ रहता था। दोनों बच्चे डीपीएस स्कूल में पढ़ते थे। बताया जा रहा है कि करीब 20 दिन पहले पति-पत्नी के बीच कहासुनी हो गई थी और प्रणव की सास भी आई थी जिसने दोनों को समझाया था। उसके बाद वह चली गई। शनिवार रात को भी दोनों के बीच झगड़ा हुआ बताया जा रहा है। इसके चलते उन्होंने यह कदम उठाया। वहीं, बच्चों का कहना है कि वे रात 10 बजे सो गए थे। जब सिक्योरिटी गार्ड ने जगाया तो पता चला। रात को उन्होंने झगड़े की कोई आवाज नहीं सुनी।
अब दादा-दादी पर आई पालन-पोषण की जिम्मेदारी
प्रणव के दो बच्चे हैं। इनके सिर से मां-बाप का साया नहीं रहा। जो बच्चे कल तक अपने माता-पिता की गोदी में खेल रहे थे उन्हें तो अभी होश भी नहीं संभाला था। दोनों बच्चों को कुछ समझ नहीं आ रहा कि उनके साथ क्या हो रहा है। माता-पिता की मौत के बाद दोनों बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेवारी अब बूढे दादा-दादी पर आ गई है।