अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। 10वीं, 12वीं में हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड में टॉप करने वाले छात्र की डुप्लीकेट डीएमसी निकलवा कर फर्जी तरीके से इंडियन आर्मी में नौकरी कर रहे हैं। टॉपर बच्चे का चयन डाक विभाग में हुआ तो इस फर्जीवाडे़ खुलासा हुआ। अब टॉप करने वाला बच्चा तो बेरोजगार घूम रहा है और उसकी डीएमसी पर अन्य फर्जी लोग नौकरी कर रहे हैं। बच्चे का पिता अधिकारियों, सीएम विंडो पर शिकायत कर-करके परेशान है। न्याय मिलने की जगह उसे धमकियां, रुपयों का लालच मिल रहा है। पुलिस अधीक्षक को दी शिकायत और इकोनोमिक सेल की जांच के बाद अब पुलिस ने एक युवक के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। पीड़ित बच्चे के पिता का आरोप है कि उसका मुख्य गुनहगार तो बोर्ड है, जिसने बिना किसी जांच के उसकी डुप्लीकेट डीएमसी फर्जी लोगों के हाथों में थमा दी।
जींद जिले के गांव खरल वासी मजदूर ओमप्रकाश के बेटे गुरमीज ने 2014 में हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा में 95.4 फीसदी अंक लेकर टॉप किया। इसके बाद 2016 में मेडिकल संकाय से 86.8 फीसदी अंक हासिल किए। गुरमीत की फर्जी तरीके से जनवरी 2016 में रोजखेड़ा वासी एक युवक ने बाई हैंड डीएमसी निकलवा ली। इसी तरह जनवरी 2017 में गुरमीत की बारहवीं की डीएमसी बोर्ड से फर्जी तरीके से निकलवा ली।
मामला दिसंबर 2017 में खुला, डुप्लीकेट डीएमसी से आर्मी में नौकरी कर रहा आरोपी
टॉपर गुरमीत ने पारिवारिक हालत अच्छे नहीं होने के कारण 10वीं आधार पर डाक विभाग में निकली नौकरी के लिए आवेदन किया। उसका चयन हो गया। दिसंबर 2017 में वेरिफिकेशन हुआ तो पता लगा कि उसकी 10वीं की डीएमसी के आधार पर तो किसी की नौकरी लगी हुई है। जिसके बाद जांच पड़ताल शुरू हुई तो सारा खेल खुला। गुरमीत के पिता ओमप्रकाश ने बताया कि उसके बेटे की 12वीं की डुप्लीकेट डीएमसी के माध्यम हिसार जिले के गांव पेटवान का विकास नामक युवक इंडियन आर्मी में क्लर्क की नौकरी कर रहा है जो कि पंजाब से चयनित हुआ।
गांव के ही युवक ने खेला सारा खेल
गुरमीत की फर्जी डीएमसी का सारा खेल उसके गांव के ही एक युवक अमित ने रचा। पुलिस ने प्राथमिक आधार पर अमित के खिलाफ ही धोखाधाड़ी का केस दर्ज किया है। गुरमीत के पिता ओमप्रकाश ने बताया कि अमित ने उसके बेटे की डीएमसी लेने के लिए फर्जी राशन कार्ड, फर्जी आधार कार्ड तैयार किए। उसके पिता का नाम कृपाल सिंह है जबकि 10वीं की डुप्लीकेट डीएमसी निकलवाने के लिए जो फर्जी राशनकार्ड बनाया गया उसमें उसके पिता का नाम वाघाराम दिखा गया। इसी तरह 12वीं की डुप्लीकेट डीएमसी निकलवाने के लिए जो राशन कार्ड प्रयोग किया गया, उसमें उसके पिता का भेजराज दिखाया गया है।
नाम गुरमीत का, फोटो फर्जी
डुप्लीकेट डीएमसी और नौकरी लगने के लिए जो कागजात प्रयोग किए गए, उन सब में नाम तो गुरमीत का ही है मगर फोटो बदल दिया गया है। डीएमसी में फर्जी तरीके से फोटो बदलकर नौकरी पाई गई है। यानी अब इंडियन आर्मी में फर्जी तरीके से क्लर्क लगा युवक गुरमीत के नाम पर नौकरी कर रहा है।
बच्चों को मजदूरी कर की पढ़ाई, अब हो रहे धोखाधड़ी के शिकार
गुरमीत के पिता ओमप्रकाश ने बताया कि वह मजदूरी करता था। 2010 में लेंटर गिरने से उसकी रीढ की हड्डी टूट गई और वह दिव्यांग हो गया। तीन साल बिस्तर पर रहा। ऐसे में उसके दोनों लड़के बलदीप और गुरमीत ने मजदूरी कर ना केवल घर चलाया बल्कि अपनी पढ़ाई भी की। पढ़ाई में होनहार होने का इनाम उन्हें धोखाधड़ी के रूप में मिला। बोर्ड कर्मचारियों की लापरवाही और मिलीभगत के कारण उसका परिवार तनाव में रह रहा है। उसे व उसके बच्चों को जान से मारने की धमकियां मिल रही है। कभी 15 से 20 लाख रुपये दिए जाने का प्रलोभन दिया जा रहा है। हमने अपने स्तर पर जांच की तो पाया कि अनेक लोग इस तरह धोखाधड़ी के शिकार हुए है और ऐसा करने वाला पूरा गिरोह है।
इकोनामिक सेल की जांच के आधार पर अमित नामक युवक के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया है। जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार किया जाएगा। जिसके आधार पर आगामी जांच होगी। हमारा प्रयास रहेगा कि पीड़ित को न्याय मिले।
उर्मिला, इंचार्ज, सेक्टर 13 चौकी