अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। गोसेवकों और पशुपालन विभाग के चिकित्सकों के बीच छिड़ा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। शुक्रवार सुबह गोसेवकों ने सीडी जारी करते हुए एक चिकित्सक पर नॉन प्रेक्टिस अलाउंस लेने के बावजूद प्राइवेट प्रेक्टिस करने के आरोप लगाए तो शाम को गोरक्षा दल के प्रधान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। प्रधान संजय परमार को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। इसके विरोध में गोसेवकों ने शहर में जुलूस निकाला और कैंडल मार्च निकाल रोष जताया। गोसेवकों ने शनिवार से भूख हड़ताल करने की चेतावनी दी।
तीन अगस्त की रात से गोसेवकों और पशुपालन विभाग के चिकित्सकों के बीच शुरू हुआ विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। अब तक दोनों पक्षों के समर्थन में लोग एकत्रित होकर प्रदर्शन कर रहे थे। शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे गोरक्षा दल के प्रधान संजय परमार ने लघु सचिवालय के बाहर चल रहे धरने पर एक सीडी जारी की जिसमें पशुपालन विभाग का चिकित्सक प्राइवेट प्रेक्टिस करते हुए दिखाया गया है। वह एक गाय का इलाज करने के बाद 200 रुपये शुल्क भी लेते हैं। गोसेवकों ने आरोप लगाया कि सरकारी ड्यूटी में होने के बावजूद चिकित्सक प्राइवेट प्रेक्टिस कर रहा है। इतना ही नहीं नॉन प्रेक्टिस अलाउंस भी ले रहा है। इसके बावजूद घायल लावारिस पशुओं का इलाज करने की बजाय प्राइवेट प्रेक्टिस को तवज्जों दी जा रही है। उन्होंने लावारिस पशुओं का इलाज करने से मना करने वाले चिकित्सकों पर कार्रवाई करने, गोसेवकों से मारपीट करने वाले चिकित्सक व अन्य पर कार्रवाई करने की मांग की।
दोपहर में सीडी जारी करने वाले गोरक्षा दल के प्रधान संजय परमार को सिविल लाइन थाना पुलिस ने दोपहर बाद साढ़े तीन बजे गिरफ्तार कर लिया। उन्हें तीन अगस्त को चिकित्सकों के साथ अभद्र व्यवहार करने, झगड़ा करने के आरोप लगाते हुए दर्ज करवाए गए केस में गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया जहां से जेल भेज दिया गया।
गिरफ्तारी से खफा गोसेवकों ने किया प्रदर्शन
गोरक्षा दल के प्रधान संजय परमार की गिरफ्तारी के विरोध में गोसेवक धरनास्थल पर एकत्रित हुआ। यहां से जुलूस के रूप में सभी पशु चिकित्सकों, प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए घंटाघर चौक तक पहुंचे। यहां से कैंडल मार्च निकाला। कैंडल मार्च में गोसेवक घंटाघर से हांसी गेट चौक, वहां से वापस घंटाघर चौक, हांसी रोड, कोर्ट मार्ग होते हुए वापस धरना स्थल पर पहुंचे। गोसेवकों ने झूठा केस दर्ज करवाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसके विरोध में शनिवार से भूख हड़ताल शुरू की जाएगी।
यूं शुरू हुआ विवाद
तीन अगस्त की रात को हालुवास गांव में एक मोर संदिग्ध परिस्थितियों में घायल हो गया। गो रक्षा दल के सदस्यों ने पशुपालन विभाग के उपनिदेशक को फोन कर सहायता मांगी। उन्होंने एसडीओ को सूचित किया। इसके बाद एक चिकित्सक की ड्यूटी लगाकर चिड़ियाघर भेजा गया। गोसेवकों ने एसडीओ से फोन कर चिकित्सक की जानकारी मांगी तो डॉक्टर का नाम बताने को लेकर विवाद हुआ। चिड़ियाघर के सामने जब चिकित्सक ने मोर की जांच की तो मोर मृत मिला। इसी दौरान एसडीओ भी वहीं पहुंच गए जहां विवाद हुआ। गोसेवकों ने एसडीओ को मोर की मौत का जिम्मेवार ठहराते हुए मेनका गांधी और सीएम कार्यालय में ट्विटर से शिकायत दी। इसके बाद पशु चिकित्सक उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक से मिलने पहुंचे और गोसेवकों पर अभद्र व्यवहार करने, झगड़ा करने, गाली-गलौच करने के आरोप लगाए। इसके बाद गोरक्षा दल के प्रधान संजय परमार व उसके चार साथियों के खिलाफ सिविल लाइन थाना में केस दर्ज कर दिया गया। इसके बाद विवाद लगातार बढ़ रहा है। 20 अगस्त को दो गोसेवक इमरजेंसी पहुंचे और चिकित्सक पर मारपीट का आरोप लगाया। चिकित्सक ने आरोपों को झूठा बताया। गोरक्षकों ने कार्रवाई के लिए अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जिसे विभिन्न संगठनों ने समर्थन दिया। चिकित्सकों के समर्थन में वीरवार को विभिन्न संगठनों ने शहर में जुलूस निकाल प्रदर्शन किया और गोसेवकों पर कार्रवाई की मांग की।
वर्जन:::
गोसेवकों की ओर से जारी किसी सीडी की मुझे जानकारी नहीं है। सरकारी चिकित्सक प्राइवेट प्रेक्टिस कर सकते हैं या नहीं ये तो रजिस्ट्रार सोसायटी ही बता सकते हैं। चिकित्सकों को नॉन प्रेक्टिस अलाउंस मिलता है या नहीं, इसकी भी जानकारी मुझे नहीं है।
-डा. जय सिंह, उप निदेशक, पशुपालन विभाग
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वर्जन:::
चिकित्सकों के साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट मामले में संजय परमार को गिरफ्तार किया गया है। उसे कोर्ट में पेश कर जेल में भेज दिया है।
-अजीत सिंह, एसएचओ, सिविल लाइन थाना