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प्राइवेट बस ने कॉलेज जा रहे बीटैक फाइनल के छात्र को कुचला, इलाज के लिए ले जाते समय तोड़ा दम

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अमर उजाला ब्यूरो
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भिवानी। तोशाम बाईपास ओवरब्रिज टीआईटी स्कूल के पास एक निजी बस ने बी.टेक फाइनल के छात्र को कुचल दिया। गंभीर रूप से घायल छात्र को परिजन उपचार के लिए इमरजेंसी लेकर पहुंचे। प्राथमिक उपचार के बाद घायल को पीजीआई रोहतक रेफर किया गया मगर परिजनों ने हिसार के एक निजी अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया। परिजन जब उसे हिसार ले जा रहे थे तो रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। जिसके बाद परिजन उसे वापस भिवानी लेकर पहुंचे। इकलौते बेटे को खोने के गम में माता-पिता और बहन का रो-रोकर बुरा हाल था। इसके बावजूद परिजनों ने उसकी नेत्रदान करने का निर्णय लिया। हादसे के बाद निजी बस चालक मौके से फरार हो गया। पुलिस ने बस चालक के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाकर हादसा करने का केस दर्ज किया है।
हादसा वीरवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे हुआ। जाट कॉलोनी वासी 23 वर्षीय छात्र निशांत टीआईटीएस से बी.टेक कर रहा था। वह अंतिम वर्ष में था और उसका चयन गुजरात की एक कंपनी में भी हुआ था। कंपनी ने कुछ सर्टिफिकेट मांगे। वह सर्टिफिकेट लेने के लिए ही कॉलेज जा रहा था। जब उसने तोशाम बाईपास ओवरब्रिज पार कर कॉलेज की ओर स्कूटी मोड़ने का प्रयास किया, तभी तोशाम की ओर से आई एक निजी बस ने उसकी स्कूल को टक्कर मारी और वह बस के अगले पहिये के नीचे कुचला गया। वहां से गुजर रहे कॉलेज के अन्य विद्यार्थी उसे तुरंत उपचार के लिए सामान्य अस्पताल की इमरजेंसी लेकर पहुंचे। सूचना पर परिजन भी अस्पतालं पहुंच गए। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सक ने घायल को पीजीआई रोहतक रेफर किया। मगर परिजनों ने हिसार ले जाने का फैसला किया। परिजन जब उसे हिसार के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे तो वहां छात्र ने दश्म तोड़ दिया। जिसके बाद शव को वापस भिवानी सामान्य अस्पताल लाया गया।
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निशांत अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। कांग्रेसी नेता प्रधान कमल सिंह ने बताया कि निशांत के पिता संजीव की बीटीएम नचौक के समीप ही फर्नीचर की दुकान है, जबकि उसकी माता मोनिका कोंट गांव सरकारी स्कूल में टीचर है। उसकी एक छोटी बहन राधिका है, जो बारहवीं कक्षा की छात्रा है। मृतक युवक के पिता संजीव मूल रूप से गांव धनाना निवासी हैं और पिछले 40 सालों से जाट कॉलोनी में ही रहते हैं। इस दुखद हादसे की सूचना के बाद ही परिवार में मातम छा गया। बीटेक इंजीनियरिंग के छात्र की मौत के बाद कॉलेज में भी माहौल गमगीन हो गया।

बेटा पढ़ाई में था होशियार, उसके बिना जिंदगी भी बन गई बोझ
इकलौते बेटे को हादसे में खो देने के बाद पिता संजीव पूरी तरह से टूट कर बिखर गया। उसने बताया कि बेटे को इंजीनियर बनाने का सपना पूरा होने ही वाला था कि वह दुनिया को अलविदा कर गया। उसके बेटे का चयन गुजरात की एक निजी कंपनी में हो गया था, क्योंकि फाइनल ईयर की पढ़ाई पूरी होने से पहले ही कॉलेज में उसकी प्लेसमेंट हो गई थी। उसे अच्छा खासा पैकेज भी मिला था।
हादसे में इकलौता बेटा खोने के बाद नेत्रदान का संकल्प बड़ा फैसला
निशांत के माता-पिता ने बेटे को खोने के सदमे के बीच अपने बेटे की आंखे दान करने का निर्णय लिया। जिसके बाद जालान अस्पताल के चिकित्सकों को सूचित किया और नेत्रदान की। मृतक के पिता ने कहा कि बेटे की याद हमेशा उनके लिए ताकत बनी रहे, इसके लिए नेत्रदान का संकल्प लिया और पोस्टमार्टम कराने से पहले बेटे का नेत्रदान करा दिया। अब बेटे की आंखें भले ही उनके जीवन में अंधेरा कर गई, लेकिन दूसरों की जिंदगी को वो रोशन कर दुनिया को देखेगी। राजकीय किशनलाल जालान नेत्र अस्पताल के इंचार्ज डॉ. एडमिन ने कहा कि सड़क हादसे में इकलौते बेटे को खोना दुखद घटना हैं, मगर फिर भी परिजनों ने नेत्रदान का साहस दिखाते हुए बड़ा फैसला लिया है, यह सराहनीय है। उन्होंने बताया कि मौत के छह से आठ घंटे के दौरान नेत्रदान किया जा सकता है। उनकी टीम ने निशांत का नेत्रदान करा दिया है।
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निशांत के शव का जिला सामान्य अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया और मृतक के पिता संजीव के बयान दर्ज कर इस सम्बंध में निजी बस चालक के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने का केस दर्ज किया। जांच अधिकारी सुरेश ने बताया कि हादसे में मृतक के शव का पोस्टमार्टम करा परिजनों को सौंप दिया।
सुरेश कुमार, इंचार्ज
टीआईटी चौकी
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