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दो की जान लील गई हुडा विभाग की लापरवाही

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दो की जान लील गई हुडा विभाग की लापरवाही
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अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी
अगर राजेश और मुकेश के पास सेफ्टी किट होती तो शायद उनकी जान बच जाती। उन्होंने सेफ्टी बेल्ट तो लगा रखी थी, लेकिन आक्सीजन सिलेंडर, मास्क, हेलमेट और अन्य उपकरण दोनों के पास नहीं थे। नियम तो यह भी कहते हैं कि सीवरमैन एसडीओ और जेई की उपस्थिति में ही सीवर में उतर सकता है। मगर हकीकत इसके इतर है।
साफ शब्दों में कहें तो तय नियमों के पालन न होने की वजह से इंडस्ट्रियल एरिया सीवर हादसा हुआ। सेफ्टी बेल्ट के अलावा मृतकों के पास कोई बचाव के उपकरण नहीं थे। नियमों की बात करें तो सीवर सफाई का काम एसडीओ और जेई स्तर के अधिकारियों की उपस्थिति में होना जरूरी है। लेकिन, हुडा के अधिकारियों की मौजूदगी तो दूर यह तक पता नहीं कि किसकी शिकायत और किसके निर्देश पर दोनों सीवर साफ करने गए थे।
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हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (हुडा) के एसडीओ भूपेंद्र सिंह बताते हैं कि सीवरमैन को जरूरी साजो-सामान दिया गया, लेकिन इस्तेमाल नहीं किया गया। भूपेंद्र ने बताया कि मार्च महीने में ठेकेदारों को पत्र लिखकर बाकायदा आगाह किया गया था कि हर कर्मचारी के लिए सेफ्टी किट जरूरी हैं।
विभाग की अपनी सफाई-दलील हो सकती हैं। लेकिन, यह सच है कि दोनों सीवरमैन की मौत सेफ्टी किट न पहनने की वजह से हुई है।

सीवर सफाई के लिए इन नियमों पर अमल जरूरी
- मेनहॉल का ढक्कन खोलते ही तुरंत न झांके
- जिस सीवर पर काम करना है, उसके दो आगे और दो पीछे के सीवर के मैनहॉल के ढककर दो घंटे पहले खोलने जरूरी हैं। दुर्घटना रोकने के लिए बैरिकेट्स भी लगाए जाने चाहिए
- सरकार के निर्देशों के अनुसार किसी भी सीवरमैन को मैनहॉल के अंदर नहीं उतरना है। यदि कोई सीवरमैन कनिष्ठ अभियंता व उपमंडल अभियंता की उपस्थिति के बगैर मैनहोल में नीचे उतरता तो उसके विरुद्ध सरकार के निर्देशों के अनुसार आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।
- किसी भी आपात स्थिति में सीवर मैनहोल के कार्य करने के लिए सभी आवश्यक उपकरण जैसी सेफ्टी बेल्ट, मास्क हेलमेट, रिफ्लेक्टिंग जैकेट, गम बूट, चश्मा जरूरी है।
- किसी भी मैनहोल का कवर बगैर कनिष्ठ अभियंता को सूचित कि ए न हटाया जाए और बगैर कार्य के खोल कर कर न रखा जाए।

31 मार्च को खत्म हो चुका है ठेकेदार का टेंडर
एसडीओ बताते हैं कि दोनों कर्मचारी ठेकेदार के माध्यम से विभाग से जुड़े हैं। लेकिन, ठेकेदार का टेंडर 31 मार्च को खत्म हो चुका है। नया टेंडर प्रोसेसिंग में है।

न इस्टेट ऑफिसर, न एसडीओ
हुडा विभाग की ओर से यहां इस्टेट ऑफिसर की पोस्ट है। लेकिन, इस पद पर नियमित नियुक्ति नहीं हुई है। हिसार के कार्यकारी अभियंता के पास भिवानी के इस्टेट ऑफिसर का अतिरिक्त प्रभार है। यहां एसडीओ की भी नियमित नियुक्ति नहीं है। एसडीओ भूपेंद्र सिंह हिसार बैठते हैं। उनके पास भिवानी, सिरसा, सफीदों, चरखी दादरी का भी प्रभार हैं।
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दो महीने पहले मुकेश की हुई थी दूसरी शादी
राजेश को दो लड़कियां व एक लड़का सहित तीन बच्चे है। मृतक नरेश के भाई नरेश ने बताया कि मुकेश की करीब दो महीने पहले ही दूसरी शादी हुई थी।

मांगों के लिए 11 सदस्यीय कमेटी गठित
दोनों मृतकों के परिजनों की ओर से अपनी मांग प्रशासन के सामने रखने के लिए 11 सदस्यों की कमेटी गठित की गई है। बताया जा रहा है कि मृतकों के परिजनों की ओर से प्रशासन के सामने 10 लाख रुपये का क्लेम, 25 लाख रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने मांग प्रशासन के सामने रखी जाएगी।
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