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Bhiwani News: भ्रष्टाचार के पंच ने तोड़ा विजेंद्र का सपना...स्टेडियम बना न बदली गांव की सूरत

Sat, 31 Aug 2024 05:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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भिवानी। अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज विजेंद्र सिंह का सपना था कि उसके गांव में स्टेडियम बने ताकि युवा खिलाड़ी यहां से अपने हुनर को तराश कर देश के लिए मेडल ला सके। लेकिन उसका यह सपना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज और एशियाड खेलों में गोल्ड मेडल जीतने के बाद तत्कालीन हुड्डा सरकार ने विजेंद्र के गांव कालूवास में स्टेडियम निर्माण सहित अन्य विकास कार्यों के लिए 72 लाख रुपये दिए थे, ताकि गांव का नक्शा ही बदल जाए, लेकिन सरपंच व सचिव सहित अन्य ने पूरी राशि डकार ली। पंचायत के खाते से फर्जी तरीके से राशि निकालकर दुरुपयोग किया। नतीजतन न तो गांव में स्टेडियम बन सका और न ही अन्य किसी तरह के काम हो पाए। इस पर विजेंद्र सिंह के भाई ने सीएम को शिकायत की थी, जिसके बाद जांच में भ्रष्टाचार की परतें खुलतीं गईं।
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हुड्डा सरकार ने एशियाड खेलों में पदक जीतने पर 51 लाख और कॉमनवेल्थ खेलों में ब्रॉन्ज पदक हासिल करने पर 21 लाख रुपये देने की घोषणा की थी। यह पैसा विजेंद्र के गांव में खेल स्टेडियम निर्माण और अन्य विकास कार्यों पर खर्च किया जाना था। सरकार से राशि भी आई, लेकिन तत्कालीन सरपंच रमेश कुमार ने ग्राम सचिव जितेंद्र से मिलीभगत कर फर्जी फर्माें व फर्जी हस्ताक्षर से इस राशि को ग्राम पंचायत के खाते से निकलवाकर खुद ही हड़प ली। इसकी भनक जब विजेंद्र के बड़े भाई मनोज बैनीवाल को लगी तो उन्होंने मुख्यमंत्री से शिकायत की। तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस मामले की जांच हिसार विजिलेंस को सौंपी। विजिलेंस जांच में करीब 13 लोगों को गबन में शामिल पाया गया।आरोपियों पर धोखाधड़ी सहित षड्यंत्र व भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम सहित अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया और गिरफ्तारी भी हुई। संवाद
गांव में नहीं है खेल स्टेडियम : मनोज



विजेंद्र सिंह के बड़े भाई मनोज बैनीवाल ने बताया कि गांव के बेटे ने विश्वस्तर पर मुक्केबाजी में धमक दिखाई, जिसकी बदौलत तत्कालीन सरकार ने भी दिल खोलकर विकास के लिए पैसा दिया। 72 लाख रुपये से गांव में खेल स्टेडियम व अन्य विकास कार्य करवाए जाने थे, जो आज तक नहीं हो सके हैं। खेलों में विजेंद्र की जीत की बदौलत मिला पैसा किसी भी विकास कार्य में लग जाता तो भी कोई बात नहीं थी, लेकिन पूरा पैसा सरपंच व अन्य ने डकार लिया।
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