कोरोना पॉजिटिव भिवानी के दूसरे जमाती की चौथी रिपोर्ट निगेटिव आने पर अस्पताल से किया डिस्चार्ज, कहा- चिकित्सकों ने अच्छे से रखा, सभी का शुक्रिया
अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। जैसा कोरोना वायरस के बारे में पता लगा और लोगों से इस बीमारी के बारे में सुना कि कितनी खतरनाक है, तो मन में बहुत डर था। मगर वह 16 दिन तक अस्पताल में रहा। चिकित्सक न केवल उसकी देखभाल कर रहे थे बल्कि उसका हौसला भी बढ़ा रहे थे। उनकी बदौलत आज में ठीक होकर घर पहुंचा हूं।
यह कहना है मानहेरू वासी कोरोना पॉजिटिव रहे दूसरे जमाती का। 52 वर्षीय उक्त जमाती की पहली दो रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव रही। मगर बाद की दो रिपोर्ट निगेटिव आई, जिसके बाद वीरवार को उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि भिवानी में अब तक दो ही पॉजिटिव मामले सामने आए हैं। इनमें एक मानहेरू गांव से तो दूसरा संडवा गांव से है। दोनों जमाती दिल्ली गए थे। 20 मार्च को दोनों दिल्ली से आए और 30 मार्च को सूचना मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की टीम दोनों को अस्पताल लेकर आई। दोनों के पहले टेस्ट की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। नौ अप्रैल को दोनों के सैंपल जांच के लिए दोबारा भेजे गए। तब संडवा वासी जमाती की रिपोर्ट तो निगेटिव आई मगर मानहेरू वासी जमाती की रिपोर्ट पॉजिटिव रही। संडवा वासी जमाती की तीसरी रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी देकर 14 दिन के लिए होम क्वारंटीन किया गया। वहीं मानहेरू वासी जमाती का 14 अप्रैल को तीसरा सैंपल जांच के लिए भेजा गया, जिसकी रिपोर्ट निगेटिव आई। 15 अप्रैल को उसका चौथा सैम्पल भेजा गया। वीरवार को इसकी रिपोर्ट भी निगेटिव रही। इसके बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने राहत की सांस ली है।
मुझे लगा ही नहीं कि मुझे कोई बीमारी है
ठीक होने के बाद जमाती ने बताया कि उसे कभी लगा ही नहीं कि उसे कोई बीमारी है। पहले उसे थोड़ी खांसी थी। उस समय वह कभी जमीनी पानी तो कभी नल का पानी पी लेता था। उसे लगा कि उस वजह से है। मगर जब उसे लोहानी अस्पताल ले जाया गया तो थोड़ा भय लगा। वहां तीन दिन रखा गया। वहां से रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उसे अस्पताल में बने आइसोलेशन वार्ड में ले जाया गया, जहां वह और एक लड़का और था। उन्हें अलग-अलग रखा गया। वह पूरे हॉल में अकेला था। बस वहां प्रार्थना करता रहता और समय पर दवाइयां, खाना लेता। डाक्टर आते तो उनसे भी पूछता कि मैं ठीक तो हो जाउंगा। डाक्टर हौसला बढ़ाते कि तुम ठीक हो। मैंने सुना था कि 14 दिन में यह बीमारी आदमी को मार देती है, पूरे परिवार को मार देती है। इस कारण ज्यादा भय था। मगर डाक्टरों ने उसका हौसला बढ़ाया। अब वह बिल्कुल ठीक है।