सीएम विंडो में दी शिकायत दिखाते हुए अजीत
भिवानी। सिंचाई एवं जन संसाधन विभाग से सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के तहत मिनी स्प्रिंकलर फव्वारा सेट लेने वाले किसानों के नाम पर सब्सिडी का खेल चल रहा है। सूक्ष्म सिंचाई परियोजना की आड़ में डीलर ने एक किसान की लाखों रुपयों की सब्सिडी डकारने का मामला भी उजागर हुआ है। पीड़ित किसान ने मामले की शिकायत सीएम विंडो में देकर बड़े पैमाने पर सब्सिडी घोटाले की आशंका जताते हुए इसकी विजिलेंस से जांच कराने की मांग भी उठाई है।
वहीं पीड़ित किसान का यह भी आरोप है कि उसने कोई पैसा जमा नहीं कराया, फिर भी उसके नाम से लाखों रुपयों की सब्सिडी डीलर डकार गया। उसने यह भी आशंका जताई है कि डीलर अधिकारियों की मिलीभगत से काफी किसानों के नाम पर करोड़ों की सब्सिडी डकार बड़ा घोटाला कर रहे हैं। इसकी जांच होने पर कई बड़े अधिकारियों की संलिप्तता भी उजागर होगी।
सीएम विंडो में दी शिकायत दिखाते हुए दिनोद रोड शास्त्री नगर निवासी अजीत ने बताया कि उसकी गांव केहरपुरा में करीब चार एकड़ भूमि है। उसने सरकार द्वारा चलाई जा रही सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के तहत मिनी स्प्रिंकलर फव्वारा सेट लेने के लिए करीब दो साल पहले लोहारू रोड पर बने एक डीलर के ऑफिस में गया था। डीलर ने उससे फव्वारा सेट के लिए कुछ कागजात मांगे थे। जो उसे उपलब्ध करा दिए थे। इसके बाद कई महीने तक वह चक्कर लगाता रहा। अजीत ने बताया कि डीलर ने उसे अपने कार्यालय में बुलाकर दो अधिकारियों से मिलवाया। इसके बाद डीलर अपनी गाड़ी में ही उन अधिकारियों के साथ उसे बैठाकर तीन नोजल रखकर उसे लोहारू रोड एक कॉलेज के पास अनजान व्यक्ति के खेतों में ले गया। जहां उसका तीनों नोजलों के साथ फोटो भी खिंचा गया। उसे बताया गया कि ये महज औपचारिकता है। इसके बाद सप्ताह बाद आकर फव्वारा सेट ले जाना। अजीत का आरोप है कि उसे आज तक कोई फव्वारा सेट नहीं दिया। उसे अब पता चला कि छह माह पहले ही डीलर ने उसके नाम से खेत में फव्वारा सेट लगाने के नाम पर आई एक लाख 43 हजार रुपये की सब्सिडी भी खुद ही हजम कर ली। जबकि उसने फव्वारा सेट लेने के लिए कोई राशि तक जमा नहीं कराई थी। अजीत का आरोप है कि अधिकारियों से मिलीभगत कर डीलर ने सरकार को लाखों रुपयों का चूना लगा डाला। वहीं इस तरह के कई ऐसे किसान हैं, जिन्हें पता तक नहीं और डीलर व अधिकारी मिलीभगत कर करोड़ों रुपयों की सब्सिडी डकारकर सरकार को मोटी चपत लगाकर सब्सिडी घोटाला कर रहे हैं। जिसकी विजिलेंस जांच कराई जाए तो बड़े अधिकारियों की संलिप्तता भी सामने आएगी। किसान ने सीएम विंडो की शिकायत में उसके नाम से डीलर द्वारा डकारी गई सब्सिडी के तथ्य और सबूत भी साथ उपलब्ध कराए हैं।
कोई भी किसान अगर विभाग से फव्वारा सेट लेने के लिए आवेदन करता है तो उस आवेदन पर वेंडर फाइल तभी लगाता है जब किसान उससे सामान ले लेता है। कागजात जमा कराने पर ही मेटिरियल मिलता है और बिना वेरिफिकेशन के कोई भी सब्सिडी जारी नहीं की जाती है। अगर किसान को सब्सिडी को लेकर कोई दिक्कत या फिर वेंडर से संबंधित कोई मामला है तो संबंधित अधिकारियों से मिलकर उसका समाधान करा सकता है।
- मनीष देशवाल, कार्यकारी अभियंता सिंचाई एवं जन संसाधन विभाग भिवानी।