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नगर परिषद घोटाला : जांच में शामिल होने पहुंचे निवर्तमान चेयरमैन तो कहा - नहीं करनी पूछताछ

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भिवानी। नगर परिषद घोटाले के मामले में निवर्तमान चेयरमैन रणसिंह यादव जांच में शामिल होने के लिए मंगलवार को इकनॉमिक सेल पहुंचे। यहां पर उन्हें जवाब दिया गया कि अभी आपसे कोई पूछताछ नहीं करनी है। जरूरत पड़ी तो बुला लेंगे।
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इस मामले में पुलिस आरोपी अकाउंटेंट संजय की गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने पानीपत, दिल्ली और लखनऊ दबिश दी, लेकिन उसका सुराग नहीं लगा। पुलिस को आरोपी अकाउंटेंट से ही पूरे मामले का खुलासा होने की उम्मीद है। वह पहले भी एक घोटाले में नामजद रहा है।
घोटाले की जांच कर रही पुलिस कड़ी दर कड़ी जोड़कर सभी आरोपियों तक पहुंचने के प्रयास में है। मामले में अब तक एक्सिस बैंक के मैनेजर नितेश की ही गिरफ्तारी हुई है। उसने अकाउंटेंट व कुछ अन्य के नामों का खुलासा किया है। शुरुआत में एक-दो दफा पूछताछ में शामिल होने वाला अकाउंटेंट संजय 10 दिन से लापता है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। पुलिस की अलग-अलग टीमें पानीपत, दिल्ली, लखनऊ में उसकी रिश्तेदारी में दबिश दे रही हैं।
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निवर्तमान चेयरमैन को बुलाया, लेकिन नहीं की पूछताछ
निवर्तमान चेयरमैन रणसिंह यादव ने बताया कि इकनॉमिक सेल ने नोटिस देकर उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया था। वे पहुंचे तो कहा गया कि आप घर जा सकते हैं। आप से हमें कोई पूछताछ नहीं करनी हैं। इस पर रणसिंह ने कहा कि पूछ लो क्या पूछना है, अभी तो मैं आया हुआ हूं या मेरे को यह बता दो कि आगे कब आना है। मैं आपसे सहयोग करने के लिए तैयार हूं, लेकिन इकनॉमिक सेल प्रभारी ने कहा कि भविष्य में आप से अगर कोई पूछताछ करनी होगी तो आपके पास संदेश भेज देंगे। इसके बाद फिर उन्होंने कहा कि मेरा फोन मुझे वापस कर दो तो उनकी तरफ से कहा गया कि आपका फोन साइबर सेल में गया हुआ है। आज शाम तक आ जाएगा फोन आते ही आपको सूचना दे दी जाएगी। रणसिंह यादव ने बताया कि उन्होंने नियमों से संबंधित एक कॉपी भी इकनॉमिक सेल अधिकारियों को दी है, जिसमें साफ दर्शाया है कि उनकी चेक संबंधित कोई जिम्मेदारी नहीं होती। नगर परिषद में केवल कार्यकारी अधिकारी, सचिव, अकाउंटेंट ही चेक के लिए जिम्मेदार हैं।
पहले भी घोटाले में शामिल रहा है आरोपी अकाउंटेंट
मामले में आरोपी अकाउंटेंट संजय पहले भी घोटाले में आरोपी रहा है। उस समय नगर सुधार मंडल में घोटाले के आरोप लगे थे। सूत्र बताते हैं कि उस समय नगर परिषद के एक अधिकारी ने बचाव किया। उस समय उक्त अकाउंटेंट ने वीआरएस के लिए भी आवेदन कर दिया था। मगर बाद में वीआरएस रुकवाया गया।
फर्जी रसीद मामले में नहीं हुई अब तक कोई कार्रवाई
नगर परिषद में एक पार्षद के भतीजे पर लगे फर्जी रसीदें देकर आमजन को ठगने के आरोपों में शिकायत के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। समाजसेवी सुशील वर्मा ने बताया कि उन्होंने फर्जी रसीद मामला भी पुलिस अधीक्षक के समक्ष रखा है। हमें जल्द उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।
जमीनों के ट्रांसफर में भी करोड़ों का घोटाला
पिछले दिनों उजागर हुए जमीनों के ट्रांसफर में भी बड़ा घोटाला किया गया है। सामाजिक कार्यकर्ता सुशील वर्मा ने पुलिस अधीक्षक को शिकायत देकर बताया कि नगर परिषद में सार्वजनिक शौचालय की जमीन को अवैध रूप से कागजात में दुकान के रूप में तब्दील कर सार्वजनिक व सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जे करके करोड़ों का गबन किया गया है। शहर के जोहड़ के सुंदरीकरण के नाम पर राशि के गबन के अलावा जोहड़ों की जमीन को अवैध रूप से समाप्त करके उस पर मार्केट बना दी। सार्वजनिक जगह को अवैध रूप से बेचकर सरकारी संपत्ति का गबन किया है। जोहड़ों की सफाई के नाम पर भी करोड़ों का गबन किया गया है। नप के करीब 40 प्लॉट ग्वार फैक्टरी के पीछे हैं। जहां कागजों के साथ छेड़छाड़ करके सारे प्लॉट चहेतों को बेचकर घोटाला किया जा रहा है। यहां प्लॉट नंबर 86, 87, 92, 94 के अलावा ऑटो मार्केट की दुकान नंबर एक व चार तथा अन्य करीब 10 दुकानें हड़प ली गईं। ऐसा ही मामला रोहतक रोड एमसी कॉलोनी के प्लॉटों में किया गया है। वर्ष 2016 में शौर्य वाला मंदिर की जमीन हड़पने के संबंध में दर्ज करवाया गया था। मगर आरोपियों पर आज तक कार्रवाई नहीं की गई है। आरोप है कि पुरानी हवेलियों के मालिक बदलकर करीब 450 करोड़ की संपत्ति का गबन किया गया है।
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