जज ने इस मामले में जांच अधिकारी को अपनी स्टेटमेंट दर्ज कराने के लिए बोला तो भी जांच अधिकारी साफ इंकार कर गया। एएसआई यहीं नहीं थमा कोर्ट में जज पर इस मामले में पर्सनल इंट्रेस्ट होने के गंभीर सवाल उठा दिए। जिस पर सीजेएम ने मामले के जांच अधिकारी दशरथ पर कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षक को आदेश दिए वहीं कोर्ट के रीडर को भी न्यायालय के आदेशों की अवमानना करने पर अलग से पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के आदेश दिए। वहीं संबंधित केस में सीजेएम ने एएसआई दशरथ की जगह नए जांच अधिकारी को नियुक्त कर शहर थाना पुलिस एसएचओ से इसकी रिपोर्ट भी 16 मार्च तक कोर्ट में तलब की है।
शिकायतकर्ता ने एक वाहन कंपनी से 2016 माडल का वाहन खरीदा था। लेकिन कंपनी ने उसे 2015 का माडल दे दिया। शिकायतकर्ता ने कंपनी के उच्चाधिकारियों से बात की तो कंपनी ने अपनी गलती मानी और वाहन बदलने का आश्वासन दिया। इस पर शिकायतकर्ता ने वाहन कंपनी के कार्यालय में खड़ा कर दिया। जिसके बाद कंपनी ने उसे दूसरा वाहन तो नहीं दिया, लेकिन बकाया राशि का नोटिस जरूर भेज दिया।
इसके बाद पीडि़त ने मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक को दी। पुलिस अधीक्षक की शिकायत देने पर भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। शिकायतकर्ता ने अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट में इस्तगासा डाला। जिस पर कोर्ट ने पुलिस को इस संबंध में एफआईआर दर्ज के आदेश दिए। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की, लेकिन उसे बाद में खारिज कर डाला। इस पर शिकायतकर्ता ने प्रोटेस्ट पेटीशन डाल दी। इसी की सुनवाई के दौरान सीजेएम ने पुलिस के जांच अधिकारी के खिलाफ केस की स्टेटस रिपोर्ट देने से इंकार करने पर एसपी को कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
वहीं इस मामले में दिनोद गेट पुलिस चौकी प्रभारी एएसआई दशरथ का कहना है कि साल 2018 में पुलिस विभाग में लगे एक एसपीओ ने गाड़ी से संबंधित केस शहर थाना पुलिस में दर्ज कराया था। इस केस की फाइल तत्कालीन पुलिस अधीक्षक गंगाराम पूनिया ने विशाखापटनम भेज दी थी, क्योंकि शिकायतकर्ता का मामला यहां का न होकर विशाखापटनम का था। इस संबंध में वहां केस विचाराधीन चल रहा है। यहां केस को कैंसिल कर दिया था। मेरे से पहले छह अक्तूबर 2022 को मामले की तफ्तीश की गई थी। जिसके बाद इस मामले की फाइल मेरे पास पांच दिसंबर 2022 को आई थी। विशाखापटनम के पुलिस कमीशनर ने भी इस संबंध में पत्र जारी कर इस केस के वहां विचाराधीन होने की जानकारी देते हुए कार्रवाई अमल में लाने की बात कही थी। इसी आधार पर केस यहां कैंसिल हुआ था। मैने केस के संबंध में अपना पक्ष कोर्ट में रखा था, कोई गुस्ताखी नहीं की।