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सावधान! सफेद मक्खी की अनदेखी कर न दें कपास के खेत को खाली

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कैरू क्षेत्र के खेत में खड़ी कपास की फसल। - फोटो : Bhiwani
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भिवानी। बारिश के बाद जहां तपती गर्मी से राहत मिली है। वहीं दूसरी ओर बारिश के बाद जिले में कई जगह पर कपास की फसल में आई सफेद मक्खी और हरा तेला ने किसानों ने चिंता बढ़ा दी है। जिलेभर में इस साल दो लाख 22 हजार एकड़ में कपास की बिजाई हुई है। फसल को कीटों से बचाने के किसान खेत में कीटनाशक का छिड़काव करने में जुटे हुए है। क्योंकि अगर सफेद मक्खी के प्रकोप को समय पर नहीं रोका गया तो किसानों के लिए यह काफी नुकसानदायक साबित होगा।
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बारिश के बाद कपास के खेत में निराई गुड़ाई करनी जरूरी है। अगर बिजाई के समय डीएपी डाल दिया है तो अच्छी बारिश के बाद बीटी कपास में एक बैग यूरिया का छिड़काव करें। अगर बिजाई के समय डीएपी नहीं डाला है तो अब अच्छी बरसात के बाद उसमें डीएपी का छिड़काव करें। देसी कपास में कोई खाद डालने की जरूरत नहीं है। अधिक बारिश के बाद कपास के खेत में पानी की निकासी सुनिश्चित करें। वहीं कृषि विज्ञान केंद्र भिवानी के विशेषज्ञों ने कीटों से बचाव के लिए किसानों को महत्वपूर्ण टिप्स दिए है। संवाद
कीट प्रबंधन के लिए आवश्यक टिप्स:
कृषि विज्ञान केंद्र भिवानी से शस्य वैज्ञानिक डॉ. योगिता बाली ने बताया कि जिन किसानों ने नरमा की फसल के आसपास पिछले साल की नरमा की बनछटियां रखी हुई है या खेतों के आसपास कपास की जिनिंग व बिनौलों से तेल निकालने वाली मिल लगती है, वे किसान अपने खेतों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यक है। क्योंकि इन खेतों में गुलाबी सूंडी का प्रकोप अधिक हो सकता है।
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- गुलाबी सूंडी की निगरानी के लिए 2 फेरोमेन ट्रैप प्रति एकड़ लगाएं और इनमें फंसने वाले गुलाबी सूंडी के पतंगों को 3 दिनों के अंतराल पर गिनती करें। जून से मध्य अगस्त तक यदि इनमें कुल 12-15 पतंगें प्रति ट्रैप तीन दिन में आते है और फसल में डोडी आ गई है तो कीटनाशक के छिड़काव की आवश्यकता है। 60 दिनों तक की फसल में एक छिड़काव नीम आधारित कीटनाशक की 5 मिली मात्रा प्रति लीटर पानी के हिसाब से करें।
- कपास की फसल में 60 दिनों के होने के बाद व गुलाबी सुंडी का प्रकोप फलीय भागों पर 5-10 फीसदी होने पर एक छिड़काव प्रोफेनोफोस (क्यूराक्रोन, सेल्क्रोन, कैरिना) 50 ईसीकी 3 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी की दर से करें। इसके बाद अगला छिड़काव जरूरत पड़ने पर क्यूनालफास 20 एएफ की 4 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी की दर से 10-12 दिनों बाद करें।
- बारिश के सीजन के साथ ही कपास की फसल में थ्रिप्स/चूरड़ा का प्रकोप होता है। 60 दिनों से कम अवधि की फसल में थ्रिप्स संख्या यदि 30 थ्रिप्स प्रति 3 पत्ता मिले तो नीम आधारित कीटनाशक का प्रयोग करें। इसके बाद रासायनिक कीटनाशक अगर गुलाबी सूंडी के लिए प्रयोग किया गया हो तो थ्रिप्स का भी नियंत्रण करें।
- इन मौसम में कपास की फसल में सफेद मक्खी व हरे तेला का भी प्रकोप हो जाता है, इसलिए इनकी निगरानी रखें। सफेद मक्खी यदि 6-8 प्रौढ़ प्रति पत्ता एवं हरा तेला 2 शिशु प्रति पत्ता मिलते है तो फ्लॉनिकामिड 50 डब्ल्यूजी की 60 ग्राम मात्रा प्रति 200 लीटर पानी की दर से एक छिड़काव करें।
- कपास की शुरूआती अवस्था में ज्यादा जहरीले कीटनाशकों या कीटनाशकों के मिश्रण का प्रयोग न करें। ऐसा करने से मित्र कीटों की संख्या कम हो जाती है और रस चूसने वाले कीड़ों की समस्या बढ़ने लगती है।
रोग प्रबंधन के लिए अपनाएं ये विधि:
कृषि विज्ञान केंद्र भिवानी के कीट वैज्ञानिक डॉ. मीनू ने बताया कि पैराविल्ट के लिए लक्षण दिखाई देते ही किसान 24 से 48 घंटों के अंदर 2 ग्राम कोबाल्ट क्लोराइड 200 लीटर पानी के घोल में बनाकर 24 से 48 घंटे में खेत में छिड़काव करें, परंतु पौधे सूख जाने दवा का असर नहीं होगा। वहीं जड़ गलन बीमारी से सूखे हुए पौधों को खेत में से उखाड़ कर भूमि में दबा दें, ताकि बीमारियों को आगे बढ़ने से रोका जा सकें।
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