भिवानी। चुनावी मोड से पहले ही जातीय समीकरण साधने के लिए राजनीतिक पार्टियों के बीच होड़ मच चुकी है। यही वजह है कि बड़े नेता भी अब वातानुकूलित माहौल से निकल फसल कटाई ( लावणी) के दौर में जनता के बीच पहुंच रहे हैं। कुछ इसी तरह का नजारा दो से चार अप्रैल तक भिवानी जिले की तीन विधानसभा के 13 बड़े गांवों में भी बनेगा। जहां गांव की चौपाल पर ठेठ हरियाणवी ठाठ दिखेंगे और जनसंवाद में बैठने के लिए भी मुड्डे और खाट होंगी। इस दौरान जनता और सीएम के बीच कोई प्रोटोकॉल की औपचारिकता भी नहीं रहेंगी, क्योंकि सीएम मनोहरलाल खुद खाट पर लोगों के बीच बैठकर उनकी बात सुनेंगे।
जनसंवाद कार्यक्रम में ज्यादा प्रशासनिक औपचारिकताएं भी नहीं होंगी। ठेठ हरियाणवी देसी लहजे में मुख्यमंत्री लोगों से बात कर उनकी समस्याएं जानेंगे और उसी वक्त उनके समाधान के आदेश भी करेंगे। सादे माहौल में मुख्यमंत्री के जनसंवाद कार्यक्रम रहेंगे, जिसमें औपचारिकताएं बहुत ही कम रखी जाएंगी।
2024 के विधानसभा चुनावी मोड से पहले ही प्रदेश की राजनीति में जातीय मतदाताओं को साधने की होड़ शुरू हो चुकी है। पिछले चार सालों तक जिन नेताओं का दायरा सीमित और अत्यधिक प्रोटोकॉल से घिरा रहा है अब वे इस दायरे से बाहर निकलकर जनता के बीच उन्हीं के हिसाब से सीधा संवाद करने की राह पर चल पड़े हैं। 10 और 11 फरवरी को भिवानी में भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी की दो दिवसीय मंथन बैठक हुई थी। इसका मकसद भी 2024 का विधानसभा चुनावी विजन था। इसमें सूबे के ही नहीं बल्कि पार्टी से जुड़े केंद्रीय नेतृत्व के कई दिग्गज नेताओं ने भी भिवानी पहुंचकर कार्यकर्ताओं से आगामी चुनावों के लिए कमर कसने के साथ जीत का मंत्र दिया था। मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने भी इस बैठक में अलग-अलग बैठकें लेकर भावी विधानसभा चुनावों को लेकर कार्यकर्ताओं से सीधे बात की थी। इस बैठक के करीब पौने दो माह बाद फिर से सूबे का मुखिया भिवानी पहुंच अब कार्यकर्ताओं से नहीं सीधे जनता से संवाद करेगा। जनता संवाद का खाका भी तैयार हुआ है, लेकिन ये संवाद जनसमस्याओं से जोड़ा गया है, ताकि लोग मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी बात और समस्याएं रख सकेंगे। इसको लेकर जिला प्रशासन गांव में ही डेरा डाले हुए हैं और समस्याओं को भी चिह्नित किया जा रहा है और उनके समाधान के तौर तरीकों पर भी मंथन अधिकारी करने में जुटे हैं।
ये गांव चुनावों में जीत के लिए भी रहते हैं निर्णायक
भिवानी जिले के तोशाम, भिवानी और बवानीखेड़ा विधानसभा क्षेत्र के कुछ बड़े गांव ऐसे हैं, जो हर चुनाव में निर्णायक की भूमिका में बने रहते हैं। मुख्यमंत्री के जनसंवाद के लिए भी इन बड़े गांवों का ही चयन हुआ है। इनमें कैरू, सडवा, तोशाम कस्बा, बापोड़ा, दिनोद, धनाना, खरककलां, चांग, बलियाली, कलिंगा, तिगड़ाना, बवानीखेड़ा कस्बा शामिल है। इन गांवों में जाट, राजपुत, ब्राह्मण, बणिया सहित पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति का अच्छा खासा वोट बैंक भी है। जिन्हें साधने के लिए अब पार्टियों के बड़े नेताओं में भी होड़ मची है।
कहीं तालाब के किनारे तो कहीं पेड़ के नीचे ही होगी चौपाल
मुख्यमंत्री मनोहरलाल की 13 गांवों में जनसंवाद होंगे। किसी गांव में तालाब के किनारे तो कहीं पेड़ के नीचे ही जनसंवाद की चौपाल लगेगी। ये चौपाल कुर्सियों की नहीं बल्कि खाट और मुड्डों की होगी, जहां मुख्यमंत्री और जनता आमने-सामने बैठकर एक-दूसरे से सीधा संवाद करेंगे।
मुख्यमंत्री मनोहरलाल का जनसंवाद कार्यक्रम गांव खरक से दो अप्रैल को आरंभ होगा और कैरू में चार अप्रैल को अंतिम कार्यक्रम होगा। मुख्यमंत्री प्रदेश में भिवानी से जनसंवाद कार्यक्रम की शुरुआत कर रहे हैं। जिसमें ठेठ हरियाणवी लहजे के साथ मुख्यमंत्री भी खुद खाट और मुड्डे पर बैठकर जनता की बात सुनेंगे।
- शंकर धूपड़, जिला अध्यक्ष भाजपा।