बवानीखेड़ा। भिवानी जिले की बवानीखेड़ा तहसील ऐसी तहसील है जहां पहुंचने के लिए कोई बस सुविधा उपलब्ध नहीं है। दूर-दराज के गांवों से तहसील कार्यालय आने के लिए ग्रामीणों को घंटों पैदल चलकर या किसी निजी वाहन में बैठकर आना पड़ता है। तहसील के गांव जमालपुर, पपोसा, सिप्पर, बोहल, रतेरा, रोहनात के लिए परिवहन विभाग द्वारा पिछले कई दशकों से बवानीखेड़ा बस स्टैंड से सीधी कोई बस नहीं चलाई जा रही है।
रतेरा, बोहल, सिप्पर, रोहनात गांवों के लोगों को तहसील कार्यालय आने के लिए पैदल या किसी से लिफ्ट मांगकर जमालपुर आना पड़ता है, उसके बाद हांसी या भिवानी बस स्टैंड पर पहुंच कर बवानीखेड़ा के लिए बस पकड़कर तहसील कार्यालय पहुंचते हैं। यह स्थिति काफी सालों से बनी हुई है। जिसका अब तक कोई समाधान नहीं हुआ है। जिसके कारण बवानीखेड़ा क्षेत्र विकास के मामलों में पिछड़ गया है। गांव भुरटाना व किरावड तोशाम तहसील के गांव है, लेकिन थाना और खंड कार्यालय बवानीखेड़ा होने के कारण इन गांवों के लोगों को भी नियमित कामों के लिए बवानीखेड़ा आना पड़ता है। लेकिन कोई बस नहीं होने के कारण काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा बवानी खेड़ा से तोशाम के लिए भी कोई बस उपलब्ध नहीं है। कस्बे की एकमात्र आईटीआई जो पहले बवानीखेड़ा में थी, उसे कई साल पहले जमालपुर स्थानांतरित कर दिया गया था। इसके अलावा जमालपुर में एक प्राइवेट आईटीआई भी है। दोनों आईटीआई में सैकड़ों बच्चे पढ़ते हैं। जो कि बवानीखेड़ा व जमालपुर क्षेत्र के गांवों से आते हैं।
बवानीखेड़ा क्षेत्रवासी दीपक ने बताया कि वह भिवानी आईटीआई में एडमिशन लेना चाहता था, लेकिन सीटें नहीं होने के कारण उसका वहां एडमिशन नहीं हुआ। जिसके बाद उसका एडमिशन जमालपुर आईटीआई में हो गया। वह गरीब परिवार से ताल्लुक रखता है और उसके परिवार के पास कोई वाहन नहीं है। बसें नहीं चलने के कारण वह रोजाना पैदल या साइकिल से आईटीआई में पढ़ने जाता है। जिससे पढ़ाई भी ठीक समय से नहीं हो पा रही थी। इस कारण उसने मजबूरी में कोर्स बीच में छोड़ दिया। बवानीखेड़ा से जमालपुर की दूरी लगभग 10 किलोमीटर से ज्यादा है। ऐसे अनेक बच्चे हैं जो रोजाना साइकिल या पैदल चलकर और किसी से लिफ्ट मांगकर जमालपुर आईटीआई पढ़ने जाते हैं।
कस्बे के महिला कॉलेज में दूर-दराज के गांवों से बहुत सारी लड़कियां पढ़ने आती हैं। जिनको कॉलेज पहुंचने के लिए हर रोज संघर्ष करना पड़ता है। भिवानी तहसील का गांव सुखपुरा बवानीखेड़ा खंड का गांव है, और वही गांव बडेसरा का थाना बवानीखेड़ा लगता है। इन दोनों गांव के लोगों को थाना व खंड कार्यालय आने के लिए पहले भिवानी पहुंचना पड़ता है। उसके बाद 20 किलोमीटर का सफर तय करके बवानीखेड़ा आना पड़ता है। यह समस्या इन गांवों के सामने कई दशकों से बनी हुई है। गांव रतेरा के लोगों ने बताया कि पहले उनके गांव से बोहल सिप्पर से जमालपुर होकर एक बस हांसी तक आती-जाती थी, जो अब आना बंद हो गई है। इन गांवों से अनेक लड़कियां हांसी के शिक्षण संस्थानों में पढ़ती हैं।
सभी ग्रामीण रूटों पर रोडवेज की बस सेवा है। लेकिन कई गांवों और सरकारी कार्यालय मुख्य सड़क से काफी दूर लगते हैं। इसी वजह से दिक्कतें आती हैं। हरियाणा राज्य परिवहन विभाग की सभी बसों का रूट निर्धारित है जिनका संचालन उसी पर अनिवार्य है। रूट से हटकर कोई बस नहीं चलाई जा सकती है।
-डॉ नेत्रपाल खत्री, महाप्रबंधक, भिवानी डिपो हरियाणा राज्य परिवहन विभाग।