भिवानी। भिवानी जिले की आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स ने अपनी लंबित मांगों को लेकर बुधवार को प्रदेश के कृषि मंत्री जेपी दलाल के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। इसके बाद मंत्री के पीए को महिला एवं बाल विकास मंत्री कमलेश ढांडा व निदेशक के नाम ज्ञापन भेजा। धरना व प्रदर्शन की अध्यक्षता रमन भिवानी ने की व संचालन रीटा चांग ने किया।
15वें दिन के धरने-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए यूनियन व सीटू नेताओं ने कहा की हरियाणा की आंगनबाड़ी कर्मी अपनी मांगों को लेकर पिछले 15 दिनों से हड़ताल पर हैं। इसके बावजूद सरकार व अधिकारी आंदोलन को लंबा खीचकर तोड़ना चाहते हैं जिसे हरियाणा की आंगनबाड़ी कर्मी किसी भी सूरत में सहन नही करेंगी। आंगनबाड़ी कर्मी अपनी मांगों को पूरा करवाकर ही उठेंगी। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार 2018 में केंद्र सरकार द्वारा की गई घोषणा को लागू नहीं कर रही है। केंद्र व राज्य सरकार 45वें श्रम सम्मेलन की रिपोर्ट को लागू नहीं कर रही हैं, जिसमें आंगनबाड़ी कर्मियों को स्थायी कर्मचारी मानने व न्यूनतम वेतन लागू करने के लिए कहा गया है। केंद्र व राज्य सरकार जनता की समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए गीता महोत्सव व जाति व धर्म के आधार पर बांटना चाहती है। आंगनबाड़ी कर्मियों की मेहनत की वजह से महिलाओं में खून की कमी व बच्चों के कुपोषण को रोकने मे कामयाब हुई हैं। इसके बावजूद सरकार विभाग को स्थाई करने की बजाय विभाग का निजीकरण करने पर तुली हुई है। जिसको आंगनबाड़ी कर्मी किसी भी सूरत में बर्दास्त नहीं करेंगी। सीटू नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार ने कोरोना का बहाना बनाकर 44 श्रम कानूनों को खत्म करके 4 लेबर कोड में बदल दिए हैं, जो कर्मचारी-मजदूर को पूंजीपतियों का गुलाम बनाने का षड्यत्र हैं।
बुधवार के धरना व प्रदर्शन को सरोज निनान, सरोज नाथुवास, यूनियन नेत्री ईश्वर देवी, रमन, प्रकाशवती, बबीता, सुमन सैय, बाला गुजरानी, ललिता भिवानी, सुमित्रा, बिमला, बीरमती बामला, प्रिया, रोशनी कैरू, राजबाला, सुनीता, रितू चांग, राजबाला शर्मा, राजबाला निनाण, सत्यबाला मिताथल, बिमला बामला, सुषमा, प्रेम तिगड़ाना, सुनीता रिवाड़ी खेड़ा, मंजू अनीता बडेसरा, प्रेम बवानी खेड़ा, सुनीता, ओमपति देवसर, रतन जिंदल, सीटू नेता अनिल कुमार, फूलचंद, सुखदेव नरेश शर्मा रिटायर नेता, सयुंक्त किसान मोर्चा के नेता कमल सिंह किसान सभा के सचिव कॉ ओमप्रकाश, महेंद्र मिताथल, जनवादी महिला समिति की नेता बिमला घणघस, अनुराधा आदि ने भी अपने विचार रखे।