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गणपति की पूजा-अर्चना करने से मिटते हैं कष्ट

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अंबाला सिटी। सिटी के सेक्टर सात स्थित श्री नीलकंठ महादेव मंदिर में चल रहे सवा करोड़ ओम नम: शिवाय मंत्र जाप कार्यक्रम में पुजारी पंडित भगवती प्रसाद ने भगवान शिव की विशेष पूजा करवाई। इसमें सेक्टर के 100 परिवारों के सदस्यों ने ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप किया। भगवती प्रसाद शास्त्री ने कहा कि महाशिव पुराण में श्री गणेश महाराज का विशेष प्रसंग दर्शाया गया है। धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि जब भी कोई शुभ कार्य करना हो तो सर्वप्रथम भगवान श्री गणेश जी की पूजा की जाती है। श्री गणेश की पूजा करने से सभी कष्टों का निवारण होता है। महिलाएं खासकर अपने पति की लंबी आयु के लिए भगवान श्री गणेश की पूजा जरूर करती हैं।
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एक समय की बात है कि एक जगह पर भाई-बहन रहते थे। बहन का नियम था कि वह अपने भाई का चेहरा देख कर ही खाना खाती थी। एक दिन उसने रास्ते में पीपल के नीचे गणेश जी की मूर्ति रखी हुई देखी। उसने भगवान के सामने हाथ जोड़कर कहा कि मेरे जैसा अमर सुहाग सबको दीजिए। यह कहकर वह आगे बढ़ जाती थी। इस दौरान जंगल के झाड़ियों के कांटे उसके पैरों में चुभते थे। एक दिन भाई के घर पहुंची और भाई का मुंह देखकर बैठ गई। भाभी ने पूछा पैरों में क्या हो गया। उसने जवाब दिया कि रास्ते में झाड़ियों के गिरे हुए कांटे पांव में चुभ गए हैं। जब वह वापस अपने घर आ गई तो भाभी ने पति से कहा कि रास्ते को साफ करवा दीजिए। आपकी बहन के पांव में बहुत सारे कांटा चुभ गए हैं।
भाई ने कुल्हाड़ी लेकर झाड़ियां काटकर रास्ता साफ कर दिया और गणेश जी का स्थान वहां से हटा दिया। यह देखकर भगवान गुस्सा हो गए और उसके भाई के प्राण हर लिए। जब लोग अंतिम संस्कार के लिए भाई को ले जा रहे थे तो उसकी भाभी रोते हुए लोगों से कहा कि उनकी बहन आने वाली है, वह अपने भाई का मुंह देखे बिना नहीं रह सकती है। बहन अपने भाई का मुंह देखने के लिए जंगल में निकली। तब जंगल में उसने देखा कि सारा रास्ता साफ किया हुआ है। जब वह आगे बढ़ी तो उसने देखा कि सिद्धिविनायक को भी वहां से हटा दिया गया है। तब उसने जाने से पहले गणेश जी को एक अच्छे स्थान पर रखा। तब भगवान सोचने लगे, अगर इसकी नहीं सुनी तो हमें कौन मानेगा, हमें कौन पूजेगा।
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तब सिद्धिविनायक ने उसे आवाज दी, बेटी इस खेजड़ी की सात पत्तियां लेकर जाओ और उसे कच्चे दूध में घोलकर भाई के ऊपर छींटा मार देना वह उठकर बैठ जाएगा। यह सुनकर जब बहन पीछे मुड़ी तो वहां कोई नहीं था। फिर वह यह सोचने लगी कि ठीक है जैसा सुना वैसा कर लेती हूं। वह सात खेजड़ी की पत्तियां लेकर अपने भाई के घर पहुंची। उसने देखा वहां कई लोग बैठे हुए हैं। भाभी बैठी हुई रो रही है। उसने उस पत्तियों को बताए हुए नियम के तहत भाई के ऊपर इस्तेमाल किया। तब भाई उठकर बैठ गया। भाई बहन से बोला, मुझे बहुत ही गहरी नींद आ गई थी। तब बहन बोली यह नींद किसी दुश्मन को भी न आए और सारी बात अपने भाई को बताई। इसी प्रसंग के साथ कथा को विश्राम दिया गया।
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