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Ambala News: पहले नवरात्र पर की मां शैलपुत्री की पूजा

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अंबाला। पहले नवरात्र पर छावनी और शहर के विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालुओं ने पूजा कर व्रत रखा। मां के दर्शनों के लिए भक्त लंबी लंबी लाइन में खड़े रहे। श्री माता महारानी व शीतला माता मंदिर में झंडा पूजन की रस्म की गई। वहीं, सनातन धर्म मंदिर में कलश स्थापना की गई।
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चैत्र मास और अश्वनी मास में माता की विशेष आराधना होती है, परशुराम सेवादल के पूर्व अध्यक्ष श्याम लाल कौशिक ने बताया कि यह हमारी प्राचीन सभ्यता ओर संस्कृति है। नवरात्र के अवसर पर केवल भारतवासी ही नहीं अपितु विदेशों में भी लोग 9 दिन तक माता के 52 शक्ति पीठों की पूजा करते हैं और शक्ति पीठों के दर्शन कर अपना जीवन धन्य मानते है। भारत देश में नौ दिन तक दुर्गा अभिषेक, दुर्गा पूजा, दुर्गा सप्तशती का विधि विधान से पाठ करना चाहिए। मनवांछित फल पाने के लिए दुर्गा पूजा ओर नवमी को को हवन करके कंजक पूजन करना चाहिए। कुछ बंधु माता के लिए 15 दिन तक लगातार दुर्गा पूजन करते हुए वृत भी रखते हैं। यह बहुत ही श्रेष्ठ कार्य है ।
पहले नवरात्र पर छावनी की जोगी मंडी और कुम्हार मंडी स्थित श्री माता महारानी व शीतला माता मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ लगी रही और श्रद्धालुओं ने माता महारानी के दर्शन कर पूजा अर्चना की। वहीं मंदिर उप प्रधान सुधीर डिंपी गिहारा ने बताया कि पहले नवरात्र पर मंगलवार को मंदिर परिसर में झंडा पूजन का आयोजन किया गया। यह झंडा पूजन मंदिर के पुजारी अरविंद भट्ट की ओर से किया।
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छावनी के कालीबाड़ी मंदिर में पहले नवरात्र पर श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए सुबह से ही लाइन लगाकर इंतजार करते नजर आए। नवरात्र के दौरान मंदिर को भव्य तरीके से सजाया गया। वहीं माता रानी के दरबार को भी सजाया गया। पंडित सिद्धार्थ चटर्जी ने बताया कि नवरात्र के दौरान खुलने का समय सुबह साढे चार बजे से लेकर दोपहर साढे़ बारह बजे और शाम चार बजे से लेकर रात साढे़ दस बजे तक श्रद्धालुओं के लिए मंदिर खुला रहेगा। जहां पर श्रद्धालु मां काली के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।
छावनी के हिल रोड स्थित श्री सनातन धर्म मंदिर में 83वां नवरात्र महोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह नवरात्र महोत्सव 8 अप्रैल से लेकर 17 अप्रैल तक मनाया जाएगा। इस दौरान मंगलवार को पहले नवरात्र पर मंगलवार की सुबह छह बजे कलश स्थापना की गई। इसके बाद प्रतिदिन सुबह साढे़ छह बजे से लेकर आठ बजे तक सामूहिक पाठ किया गया। मंदिर में आए श्रद्धालुओं ने माता शैलपुत्री की पूजा अर्चना की। इसके बाद साढे़ सात बजे मां की आरती के बाद रात आठ बजे से लेकर साढे़ 10 बजे तक संकीर्तन किया।
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