बेटियां (महिलाएं) आज किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं है। शिक्षा, चिकित्सा सहित अन्य क्षेत्रों में अपनी काबलियत का परचम लहराने के साथ ही सैन्य बलों में भर्ती होकर देश की सेवा में जुटी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर जब अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं से बात की गई तो सभी ने इसी बात पर जोर दिया कि बालिकाओं को अगर मौका मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में किसी से कम नहीं है।
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राजकीय महिला महाविद्यालय शहजादपुर प्राचार्य रजनी भल्ला ने अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बेटियां हमारी संस्कृति और विरासत की ध्वज वाहक है। उन्होंने कहा कि माता-पिता व अभिभावकों को चाहिए कि वे बेटियों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें और उनका मार्गदर्शन कर उन्हें उच्च शिक्षा दिलाएं।
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महिला एवं बाल विकास विभाग की सुपरवाइजर सुचित्रा सैनी ने कहा कि महिलाओं एवं बालिकाओं के लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही है। जिनमें प्रमुख तौर पर आपकी बेटी हमारी बेटी, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना, महिला एवं किशोरी सम्मान योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, वन स्टॉप सेंटर तथा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ आदि जैसी योजनाएं महिलाओं एवं बालिकाओं के कल्याण के लिए चलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि बालिकाएं आगे बढ़े इस बारे में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से ग्रामवासियों को विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से जागरूक भी किया जाता है।
पीएचसी कुराली की डॉ. सुनीला वत्स ने कहा कि हर वर्ष 11 अक्तूबर को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं को सम्मान देने और समाज में उन्हें बराबरी का दर्जा देने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए यह जरूरी है कि महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी हो। जिससे कि वह अपने सामने आने वाली चुनौतियों एवं कठिनाईयों का डटकर सामना कर सकें और अपने सपनों को साकार कर सकें।
आंगनबाड़ी वर्कर रेणुबाला घडौली ने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा महिलाओं एवं बालिकाओं के कल्याण के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही है जिनमें से एक है, आपकी बेटी हमारी बेटी योजना इस योजना का उद्देश्य बालिकाओं के जन्म के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में परिवर्तन लाना। राज्य में बाल लिंग अनुपात में सुधार करने के लिए तथा स्कूलों में लड़कियों के नामांकन सुधार करना आदि है। इसी प्रकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के भी सफल परिणाम सामने आए है और लिंगानुपात में पहले से कही अधिक सुधार हुआ है।
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महिला सुषमा चौधरी ने कहा कि आज के समय में बालिकाओं का शिक्षित एवं सशक्त होना बेहद जरूरी है और इसी बात को ध्यान में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बालिका दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं आत्मनिर्भर होंगी तो वे देश और समाज के विकास में योगदान दे सकेंगी। महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना आवश्यक है।