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Ambala News: गले तो मिले मगर दूरियां रहीं बरकरार

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अंबाला शहर में कांग्रेस प्रत्याशी निर्मल सिंह आजाद प्रत्याशी व  जसबीर मलौर के गले मिलते हुए।
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अंबाला सिटी। शहर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ रहे पूर्व राजस्व मंत्री निर्मल सिंह और आजाद प्रत्याशी के तौर पर नामांकन करने वाले कांग्रेस से बागी पूर्व विधायक जसबीर मलौर पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं।
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ऐसा पहली बार हुआ है जब दोनों नेता आपस इस तरह से मिले हों और एक नेता को चुनाव में बैठने के लिए सार्वजनिक रूप से कह रहे हों। इसके साथ ही रोचक बात यह है कि अभी तक कांग्रेस में होते ही भले ही दोनों नेताओं की आपस में मुलाकात होती रहीं हो मगर ऐसा पहली बार हुआ है कि दोनों नेताओं ने एक दूसरे को गले लगाया।
निर्मल सिंह और जसबीर मलौर दोनों ही पूर्व में नग्गल हलके से चुनाव लड़ते रहे हैं। तब इस क्षेत्र में अधिकांश गांव के ही इलाके हुआ करते थे। ऐसे में दोनों जाट बिरादरी से आने वाले नेताओं का नग्गल हलके में वर्चस्व था। दोनों नेता चार बार विधानसभा चुनावों में एक दूसरे के सामने मैदान में उतर चुके हैं। जिसमें दो बार वर्ष 1996 और 2005 में निर्मल सिंह को जीत मिली थी तो एक बार वर्ष 2000 में जसबीर मलौर को जीत मिली थी।
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चौकाने वाली बात यह है कि वर्ष 1996 के चुनाव में तो निर्मल सिंह ने जेल से चुनाव लड़ा था और करीब 19 हजार मतों से जीत भी दर्ज कराई थी। वहीं वर्ष 2019 में चुनाव में दोनों ही नेता हार गए थे और इसका फायदा भाजपा के असीम गोयल को मिला था।



बागियों के लिए क्या कहता है नियम



पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में अधिवक्ता हेमंत कुमार बताते हैं कि लोक प्रतिनिधित्व कानून 1951 भारत के हर योग्य भारतीय नागरिक को चुनाव लड़ने का अधिकार प्रदान करता है। हालांकि अगर कोई व्यक्ति अपनी राजनैतिक पार्टी के निर्णय के खिलाफ जाकर बागी उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल करता है तो संबंधित राजनैतिक दल उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है। जिसमें पार्टी से निलंबन अथवा पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह वर्ष के लिए निष्कासित किया जा सकता है।
गौरतलब है कि अक्तूबर 2019 को जब निर्मल सिंह और चित्रा सरवारा ने अंबाला शहर व अंबाला कैंट से कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवारों के विरुद्ध जाकर आजाद उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया था तो कांग्रेस ने दोनों को छह-छह वर्ष के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया था। हालांकि इसी वर्ष जनवरी 2024 में निर्मल और चित्रा की कांग्रेस में घर वापसी हो गई थी।
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