अंबाला सिटी। बीते वर्ष 21 दिसंबर को मंडियां बंद रखने के बाद भी आढ़ती एसोसिएशन हरियाणा की मांगे पूरी नहीं हुई थी। इसके चलते अब आढ़तियों ने शनिवार को प्रदेश की सभी सब्जी मंडियों को बंद रखने का निर्णय लिया है।
इसी को देखते हुए अंबाला जिला की सभी सब्जी मंडियां बंद रहेंगी। जिससे सुबह किसान मंडियों में ताजी सब्जी नहीं ला सकेंगे वहीं लाेगों को रेहड़ी वालों से सब्जियां लेनी पड़ेंगी। गौरतलब है कि बीते वर्ष आढ़तियों ने मार्केट फीस और एचआरडीएफ वापसी की मांग पर हड़ताल पर जाने का फैसला लिया है। इसके चलते लोगों को भारी परेशानी होने वाली है। खासकर जिन घरों में विवाह व अन्य समारोह आयोजित होने जा रहे है, लेकिन कल सब्जी मंडी में आने वाले किसानों को भी खाली हाथ लौटना पडे़गा।
आढ़तियों का कहना है कि उपयुक्त दो मांगों के लिए वे पहले भी सरकार के समक्ष अपनी बात रख चुके हैं लेकिन सरकार की ओर से मांगों को मानने का आश्वासन दिया था। अभी तक उनकी मांगो पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जहां सरकार मार्केट फीस को कम करने के मान गई थी। आढ़तियों की मांग थी कि मार्केट फीस को पूरी तरह से माफ कर दिया जाए। इसके लिए एसोसिएशन पिछले दो वर्षों से जुटी हुई है। आढ़तियों का कहना है कि कोरोना काल के दौरान सरकार की ओर से मंडियों पर मार्केट फीस लगाई गई थी। लेकिन सरकार ने उन्हें कहा था कि हालात सुधरने के बाद इसे वापिस ले लिया जाएगा। लेकिन अभी तक भी इस फीस को वापस नहीं लिया है। अंबाला छावनी की होल सेल सब्जी मंडी एसोसिएशन के सदस्य जोगिंद्र बिंद्रा ने बताया कि सरकार ने उनकी मांगे नहीं मानी है। जिसके चलते पूरे प्रदेश में सब्जी मंडियां बंद रहेंगी। उन्होंने बताया कि अंबाला छावनी की मंडी में रोजाना 15 रुपए तक की बिक्री होती है।
सब्जियों और फलों के बढ़ेंगे दाम
हड़ताल के कारण लोगों को सब्जी मिलने में परेशानी होगी तो वहीं सब्जियों व फलों के दामों में भी उछाल देखने को मिलेगा। बीते वर्ष 21 दिसंबर को हुई हड़ताल के कारण भी लोगों को सब्जी और फल मिलने में परेशानी हुई थी। इतना ही नहीं सब्जियों व फलों की मांग को देखते हुए उनके दाम भी दो गुना हो गए थे। ऐसे में एक बार फिर से हड़ताल होने के कारण आमजन को परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
हड़ताल के सिवाय नहीं कोई विकल्प
नई सब्जी एवं फल मंडी एसोसिएशन के चेयरमैन अमर नाथ बिरला ने बताया कि हमने पहले भी सरकार को इन मांगो को लेकर पत्र सौंपें थे। लेकिन सरकार ने हामी भरने के बाद भी उनकी मांगों को नहीं माना है। जिसके चलते अब उनके पास हड़ताल के सिवाय कोई अन्य विकल्प नहीं बचा है।