अंबाला। कोरोना काल के दौरान लंबित चल रही फीस का मामला शनिवार को उस समय तूल पकड़ गया। जब सेसिल कॉन्वेंट स्कूल प्रबंधन ने दसवीं कक्षा के बच्चों को रोल नंबर देने से इंकार कर दिया।
प्रबंधन की इस कार्रवाई के लिए बच्चों के अभिभावकों ने हंगामा कर दिया और स्कूल प्राचार्य के कार्यालय के समक्ष ही जमीन पर बैठकर धरना दिया। मौके की गंभीरता को देखते हुए स्कूल प्रबंधन की तरफ से पुलिस को बुलाया। इस दौरान इनेलो के प्रदेश प्रवक्ता ओंकार सिंह भी स्कूल में पहुंच गए। उन्होंने स्कूल प्राचार्य और अभिभावकों से इस मुद्दे पर बात की और समस्या का समाधान कराया।
अभिभावकों ने बताया कि वर्ष 2021 कोरोना काल की फीस का पैसा उनसे वसूला जा रहा है जबकि इस दौरान सब कुछ बंद रहा था। उन्होंने स्कूल की जो भी फीस बनती थी, वो सही समय पर भर दी थी। बावजूद इसके प्रबंधन ने उनके बच्चों का रोल नंबर बिना किसी कारण के रोक दिया जबकि दो दिन बाद पेपर शुरू हो रहे हैं। ऐसे में उनके साथ बच्चे भी मानसिक दबाव में आ गए हैं। ऐसे में उनके लिए पेपर देना भी मुश्किल हो जाएगा। यह धरना और रोष प्रदर्शन लगभग तीन घंटे तक स्कूल परिसर में ही चलता रहा।जब मामला ज्यादा गंभीर हो गया तो स्कूल प्रबंधन ने बच्चों को रोल नंबर देने का फैसला किया।
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कोरोना काल का पैसा मांगा जा रहा है जोकि सरासर गलत है। इस दौरान न स्कूल लगे और बच्चे भी सही तरीके से पढ़ाई नहीं कर पाए। ऐसे में स्कूल का लंबित फीस मांगना गलत है। उन्हें राहत देनी चाहिए थी। लेकिन उन्होंने बच्चों का रोल नंबर रोककर परेशानी खड़ी कर दी थी।
दीपक कुमार।
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फीस को लेकर पहले ही अभिभावकों ने ऐतराज किया था कि कोरोना काल को जो भी पैसा बनता है उसे न लिया जाए। अब पेपर शुरु होने वाले हैं और फिर से इस पैसे को लेकर स्कूल ने कार्रवाई शुरु कर दी है। इसलिए रोष जताना पड़ा था।
अमित डावर।
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बच्चे पूरा साल परीक्षाओं की तैयारी में जुटे रहते हैं। ऐसे में अंतिम समय में बच्चों का रोल नंबर रोक लेना कितना उचित है। यह तो सरासर मनमानी है। कोरोना काल में जहां सभी ने एक दूसरे की मदद की, वहीं स्कूल उस समय के पैसे को लेकर तर्क-वितर्क कर रहा है।
जितेंद्र मलिक।
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बच्चों ने फोन पर जानकारी दी कि स्कूल प्रबंधन ने रोल नंबर देने से मना कर दिया है। स्कूल आकर जानकारी मिली कि कोरोना काल के समय का पैसा मांगा जा रहा है न कि मौजूदा समय का। इस कारण काफी परेशानी हुई। स्कूल प्रबंधन से बात की गई तो पहले उन्होंने पहले तो राहत देने से इंकार कर दिया, लेकिन बाद में बच्चों को रोल नंबर दे दिया।
सुशीला देवी।
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कोरोना काल के दौरान प्रत्येक व्यक्ति ने आर्थिक व मानसिक दर्द झेला है। ऐसे में स्कूल को मदद करनी चाहिए न कि उस समय के पैसोंं को लेकर अभिभावकों पर दबाव बनाना चाहिए। जबकि स्कूल की जो भी फीस बनती है वो सही समय पर भरी जा रही है।
गगन कुमार।
वर्जन
तीन साल से फीस लंबित चल रही है जोकि हजारों में पहुंच चुकी है। संबंधित अभिभावकों को कई बार फीस भरने की हिदायत दी गई, लेकिन उन्होंने फीस नहीं भरी। हमारा बच्चों के रोल नंबर को रोकने का कोई इरादा नहीं है। हमें तो अभिभावकों से बात करनी थी, जिससे कि वह लंबित फीस का भुगतान करें या फिर लिख कर दें कि कब भुगतान करेंगे। इसमें 10 से 12 अभिभावक ही हैं जो बार-बार वाद-विवाद करते हैं।
सुधीर विंडलास, चेयरमैन विद्यालय प्रबंधक कमेटी।
अंबाला छावनी के स्टाफ रोड स्थित सिसिल कॉन्वेंट स्कूल में अभिभावकों के साथ फर्श पर बैठे ओंकार
अंबाला छावनी के स्टाफ रोड स्थित सिसिल कॉन्वेंट स्कूल में अभिभावकों के साथ फर्श पर बैठे ओंकार
अंबाला छावनी के स्टाफ रोड स्थित सिसिल कॉन्वेंट स्कूल में अभिभावकों के साथ फर्श पर बैठे ओंकार
अंबाला छावनी के स्टाफ रोड स्थित सिसिल कॉन्वेंट स्कूल में अभिभावकों के साथ फर्श पर बैठे ओंकार
अंबाला छावनी के स्टाफ रोड स्थित सिसिल कॉन्वेंट स्कूल में अभिभावकों के साथ फर्श पर बैठे ओंकार