अंबाला। 30 लाख लीटर प्रतिदिन मिलने वाला पानी कम होकर 10 लाख लीटर पर पहुंच गया है। यह हालात कैंट रेलवे स्टेशन के हैं। जहां ट्रेनों में पानी भरने के अलावा, वॉशिंग लाइन, प्लेटफार्म और रेलवे परिसर सहित कार्यालयों में पानी का इस्तेमाल किया जाता है। अब हालात ऐसे हो गए हैं कि सप्ताह में एक-दो दिन पानी की सप्लाई बाधित हो जाती है। इस कारण यात्रियों को भी पीने का पानी नहीं मिल पाता।
वहीं शौचालयों और विश्राम गृह पर भी ताला जड़ना पड़ता है। स्टेशन पर पानी की सप्लाई के लिए लगाए गए तीन ट्यूबवेल में से दो पूरी तरह फेल हो चुके हैं। मात्र एक ट्यूबवेल के सहारे ही स्टेशन पर पानी की सप्लाई हो रही है। अब इस ट्यूबवेल में भी समस्या आ रही है, क्योंकि पानी का जलस्तर कम होता जा रहा है। इस कारण पानी के साथ मिट्टी व रेत आदि के आने से मोटर खराब हो रही है। इस समस्या से निपटने के लिए संबंधित विभाग ने 80 लाख की अनुमानित लागत तैयार की है और विभागीय अधिकारियों के साथ पत्राचार किया है।
20 साल पहले लगे थे ट्यूबवेल
कैंट रेलवे स्टेशन पर उत्तर भारत का सबसे महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है। यहां से पंजाब, हिमाचल, यूपी, मुंबई, राजस्थान सहित देश के सभी क्षेत्रों की तरफ ट्रेनों का संचालन होता है। रोजाना लगभग 50 हजार यात्री 310 ट्रेनों के माध्यम से आवागमन करते हैं। यहां अधिक संख्या प्रवासी श्रमिकों की रहती है जो पानी के लिए स्टेशन पर लगे नल पर निर्भर रहते हैं। इसके अलावा ट्रेनों में भी पानी भरने का काम स्टेशन पर ही किया जाता है। स्टेशन पर वर्ष 2003 में तीन ट्यूबवेल लगाए गए थे। अब इन ट्यूबवेलों की समय अवधि को 20 वर्ष हो चुके हैं, जबकि जमीन में पानी का स्तर भी काफी नीचे चला गया है।
दो पुराने ट्यूबवेल खराब पड़े हैं। मौजूदा समय में सिर्फ एक ट्यूबवेल ही कार्य कर रहा है। नए ट्यूबवेल का प्रस्ताव आया है। इसे संबंधित विभागीय अधिकारी को भेजा गया है, ताकि अनुमति व फंड मिलते ही कार्य शुरू करवाया जा सके।
-शिव पाल सिंह, स्टेशन निदेशक, अंबाला।