अंबाला। चंडीगढ़-साहनेवाल और धूरी-जाखल रेल सेक्शन के बदले मार्ग से चलने वाली ट्रेनें 47 घंटे की देरी से गंतव्य स्टेशन पर पहुंच रही हैं।
ऐसे में यात्रियों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है जो ट्रेन की जानकारी के लिए घर से रेलवे स्टेशन और रेलवे स्टेशन से वापिस घर जाने को परेशानी हैं। जबकि कुछ ने तो रेलवे स्टेशन के सहयोग केंद्र पर ही डेरा डाल लिया और एलईडी स्क्रीन पर टकटकी लगाए बैठे हैं, जिससे कि ट्रेन संचालन के संबंध में अगर कोई जानकारी हो तो वो उन्हें नजर आ जाए, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी यात्रियों के चेहरों पर मायूसी नजर आ रही है क्योंकि सहयोग केंद्र पर तैनात कर्मचारी के पास भी ट्रेन के पहुंचने की पुख्ता जानकारी नहीं है।
139 सहायता नंबर पर भी आश्वासन मिल रहा है और अगर रेलवे के एनटीईएस एप पर ट्रेन की जानकारी देखी जाती है तो वो भी स्पष्ट नहीं है कि ट्रेन कहां है, अब आएगी, आएगी भी या नहीं। बुधवार को भी ट्रेन नंबर 12413 अजमेर-जम्मूतवी 47 घंटे की देरी से, 12414 जम्मूतवी-अजमेर एक्सप्रेस 27 घंटे, 12716 सचखंड एक्सप्रेस 15.30 घंटे, 15098 अमरनाथ एक्सप्रेस 15 घंटे, 04142 एमसीटीएम-सुबेदारगंज 14 घंटे, 04651 जयनगर-अमृतसर स्पेशल 15.30 घंटे, 12715 सचखंड एक्सप्रेस 13.40 घंटे और ट्रेन नंबर 04679 गोवाहाटी-कटरा स्पेशल 12.40 घंटे की देरी से गंतव्य स्टेशन पर पहुंची। इसी प्रकार 12238 बेगमपुरा एक्सप्रेस 4 घंटे, 14610 हेमकुंट एक्सप्रेस 2.15 घंटे, 22432 एमसीटीएम-सुबेदारगंज 4 घंटे, 14650 सरयु-युमना एक्सप्रेस 3.35 घंटे, 18238 छतीसगढ़ एक्सप्रेस 1.20 घंटे, 12030 स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस 2.10 घंटे, 12472 स्वराज एक्सप्रेस 2.40 घंटे, 22487 वंदे भारत एक्सप्रेस 1.45 घंटे, 20807 हीराकुंड एक्सप्रेस 3 घंटे, 22461 श्रीशक्ति एक्सप्रेस 4.25 घंटे, 22448 वंदे भारत एक्सप्रेस 20 मिनट, 14618 जनसेवा एक्सप्रेस 4.40 घंटे, 18104 अमृतसर-टाटा एक्सप्रेस 20 मिनट, 14604 जनसाधारण एक्सप्रेस 30 मिनट, 15012 सद्भावना एक्सप्रेस 1.10 घंटे से गंतव्य स्टेशन पर पहुंची।
इंतजार, इंतजार और सिर्फ इंतजार
अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर यात्री ट्रेन पकड़ने के चक्कर में 24 घंटे पहले ही पहुंच रहे हैं ताकि उनकी ट्रेन न छूट जाए। बावजूद इसके उनका यह इंतजार लंबा खिंचता जा रहा है और वो ट्रेन के आने का इंतजार ही कर रहे हैं। इसलिए कुछ यात्रियों ने अपने आगामी यात्रा को रद्द करके वापिस लौटने का फैसला किया है तो कुछ ने दिल्ली जाकर ट्रेन पकड़ने का फैसला किया है।
बेबस और लाचार रेलवे
रेलवे की लाख कोशिश है कि ट्रेन समय पर चलें। रोजाना अधिकारी उन ट्रेनों की समय सारिणी को भी देख रहे हैं कि वो इतनी देरी से क्यों चल रही हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि जिस एकल मुख्य लाइन पर मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है, उसी पर 60 से 70 डिब्बों के साथ मालगाड़ी भी चलाई जा रही है। इस कारण रेलवे सेक्शन बार-बार बाधित हो रहा है और ट्रेनें बीच रास्ते घंटों तक फंस रही हैं।
15 वें दिन भी प्रभावित संचालन
अंबाला-लुधियाना रेल सेक्शन के शंभू रेलवे स्टेशन की रेलवे लाइनों पर बैठे किसानों का आंदोलन 15 वें दिन भी जारी रहा। इस कारण 119 ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहा। रेलवे ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए 67 ट्रेनों को पूर्ण रुप से रद्द रखा, वहीं 42 ट्रेनों को बदले मार्ग से चलाया। इस दौरान पांच ट्रेनों को बीच रास्ते रद्द करके पुन: संचालित किया गया।
वर्जन
किसान आंदोलन के ट्रेनों का संचालन काफी प्रभावित है। अब दो ही मार्ग, जिससे ट्रेनों को चलाया जा रहा है। इसमें चंडीगढ़-साहनेवाला और धूरी-जाखल रेल सेक्शन है जोकि एकल हैं। इन्हीं रास्तों से मेल व एक्सप्रेस सहित मालगाड़ियों का भी संचालन किया जा रहा है। इस कारण ट्रेनों को गंतव्य स्टेशन पर पहुंचने में काफी समय लग रहा है।
नवीन कुमार, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक, अंबाला मंडल।