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स्कूल तक बच्चों का ये सफर नहीं आसान

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स्कूली बच्चों को घर से स्कूल व स्कूल से घर ले जा रहे ऑटो चालक नियमों की जमकर धज्जियां उड़ा रहे हैं। एक ऑटो में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर उनके घरों और स्कूल तक पहुंचाया जा रहा है। इसमें केवल ऑटो ही नहीं बल्कि ई-रिक्शा संचालक भी शामिल हैं। वे मुख्य चौक चौराहों से होकर गुजरते हैं, परंतु वहां मौजूद ट्रैफिक पुलिस के मुलाजिम कोई कार्रवाई नहीं करते।
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वहीं शिक्षा विभाग की ओर से भी स्कूल और अभिभावकों पर जिम्मेदारी थोप दी गई है। उनका कहना है कि ऑटो लगाने का कार्य अभिभावकों का है इसलिए जिम्मेदारी भी उन्हीं की है। वहीं, जिस ऑटो में केवल छह लोगों के बैठने की क्षमता होती है, उसमें करीब 12 से 13 बच्चों को बैठाया जा रहा है।
बसों की तो हो जाती है जांच पर ऑटो पर नहीं कसता शिकंजा
स्कूली बसों की शिक्षा विभाग की ओर से समय-समय पर जांच कर ली जाती है। दूसरी ओर, ऑटो और ई रिक्शा चालकों पर शिकंजा कसने के लिए न तो शिक्षा विभाग कोई कदम उठा रहा है और न ही ट्रैफिक विभाग इस ओर कुछ कर रहा है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में बच्चे जान जोखिम में डालकर शिक्षा ग्रहण करने के लिए जाते हैं। वहीं कई बार ऑटो पलटने जैसी घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद प्रशासन की आंखें नहीं खुल रही हैं।
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ऑटो चालक बच्चों को क्षमता से अधिक लेकर जाते हैं। शिक्षा और ट्रैफिक विभाग को इन पर कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई हादसा न हो।
- अजय गुप्ता, अभिभावक वेलफेयर सोसायटी, अंबाला।
यह ऑटो स्वयं अभिभावकों द्वारा लगाए गए हैं। इसमें न तो शिक्षा विभाग का कोई रोल होता है और ही स्कूल का। ऐसे में यह जिम्मेदारी ट्रैफिक विभाग की है कि वह ओवरलोड ऑटों वालों के खिलाफ कार्रवाई करे।
- सौरभ कपूर, प्रमुख प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन।
हमारी ओर से समय-समय पर स्कूली बसों की जांच की जाती है। साथ ही जरूरी दिशा निर्देश भी स्कूलों को दिए जाते हैं। वहीं ऑटो में बच्चों को लाने ले जाने की जिम्मेदारी अभिभावकों की है।
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- सुरेश कुमार, डीईओ, अंबाला।
हमारी ओर से समय समय पर अभियान चलाया जाता है। भविष्य में भी ओवरलोड चल रहे ऑटो चालकों व ई रिक्शा चालकों के चालान काटने का काम किया जाएगा।
- जोगिंद्र सिंह, एसएचओ, ट्रैफिक विभाग।
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