कालका-शिमला रेलवे ट्रैक पर जल्द दौड़ते दिखेंगे हाइड्रो इंजन
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए लिया गया है फैसला
रेल मंत्रालय के निर्देश पर अंबाला डिवीजन ने शुरू किया कार्य
डीआरएम बोले-इस साल के बजट में भी प्रावधान की है उम्मीद
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला। पर्यावरण संरक्षण के लिए कालका-शिमला ट्रैक पर जल्द ही हाइड्रो इंजन दौड़ते नजर आएंगे। रेल मंत्रालय की ओर से इस संबंध में अंबाला डिवीजन को निर्देशित किया गया है। साथ ही अधिकारियों की ओर से इस दिशा में कार्य भी शुरू कर दिया गया है। इस योजना को साल के अंत तक सिरे चढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। यह जानकारी मंडल रेल प्रबंधक मनदीप सिंह भाटिया ने शुक्रवार को पत्रकार वार्ता में दी।
उन्होंने बताया कि अब रेलवे नई तकनीक के माध्यम से सफर को आसान और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए प्रयत्नशील है। इसके तहत कालका-शिमला ट्रैक पर हाइड्रो इंजनों के प्रयोग का फैसला लिया गया है। उत्तर रेलवे में कालका-शिमला रेलवे की 95.4 किलोमीटर की नैरोगेज लाइन पर हाइड्रो इंजन वाली ट्रेनों का संचालन किया जाएगा।
विदित हो कि अभी तक कालका-शिमला ट्रैक पर डीजल आधारित इंजनों का प्रयोग हो रहा है। इन इंजनों से पर्वतीय इलाकों में काफी वायु प्रदूषण होता है, जबकि पर्वतीय क्षेत्र पर्यावरण के लिहाज से काफी संवेदनशील माने जाते हैं। ऐसे में हाइड्रो तकनीक पर चलने वाले इंजनों से पर्यावरण का संरक्षण किया जा सकेगा। मंडल रेल प्रबंधक ने बताया कि इस साल बजट में भी इन इंजनों के प्रयोग की घोषणा होने की पूरी उम्मीद है। यही कारण है कि वर्ष-2023 में अंबाला मंडल के अधिकारियों ने इस प्रोजेक्ट पर कार्य शुरू कर दिया है। उम्मीद है कि साल के अंत तक इस परियोजना को अमलीजामा पहनाया जा सकेगा।
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इंजन के हिसाब से होंगे डिब्बों में बदलाव
हाईड्रो फ्यूल पर चलने वाले इंजनों को विशेष तौर पर डिजाइन किया गया है। इसके साथ हाइड्रो फ्यूल पर चलने वाली गाड़ियों के डिब्बों या कोचों को भी विशेष तौर पर तैयार किया जाएगा। खास बात है कि नार्दन रेलवे की वर्कशॉप में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर हाइड्रोजन आधारित ट्रेन का प्रोटोटाइप भी तैयार किया जा रहा है।