अंबाला। छावनी के राजकीय पीजी कॉलेज में चल रहे सात दिवसीय शॉर्ट टर्म कोर्स के दूसरे दिन कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर एसएस बूरा ने प्रतिभागियों को संबोधित किया। प्रो. बूरा ने कहा कि प्राचीन भारतीय ग्रंथ ज्ञान के भंडार हैं, लेकिन वर्तमान में इन ग्रंथों को हूबहू नहीं पढ़ाया जा सकता। नई शिक्षा नीति के तहत बनाए गए पाठ्यक्रम में इन ग्रंथों के सार को आधुनिक संदर्भों के साथ पढ़ाए जाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि पंचतंत्र व गीता की शिक्षाओं को आधुनिक शिक्षा पद्धति के साथ मिला कर पढ़ाना चाहिए। उन्होंने टूरिज्म के संदर्भ में टूरिज्म की जरूरत व इसके विकास की संभावनाओं के बारे में बताया। इससे पहले कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. देशराज बाजवा ने प्रो. बूरा का कॉलेज पहुंचने पर स्वागत किया। एकेडमिक रिसर्च सेल के कन्वीनर डॉ. अतुल यादव ने शॉर्ट टर्म की रूपरेखा प्रस्तुत की। मंच संचालन डॉ. तंजुम कांबोज ने किया। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में कॉमर्स विभाग की प्रो. अंजना, प्रो. मोना सैनी, प्रो. रिचा, प्रो. प्रभजोत, प्रो. निशा व प्रो. नविता ने भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न उप विषयों पर रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. परमिल सैनी ने की।