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Ambala News: राजनीति में गांव के लिए काम करने वाले हो गए कम

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मुलाना के धीन गांव में चौपाल पर चर्चा करते ग्रामीण।
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रमाकांत अत्री
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मुलाना। लोकसभा चुनाव में सभी पार्टियों के प्रत्याशियों ने चुनावी दौरे शुरू कर दिए हैं। गांव की चौपालों पर राजनीति के चर्चे तो हैं मगर मुद्दों से कहीं ज्यादा किस पार्टी ने कितने दमदार प्रत्याशी को चुनावी मैदान में उतारा है, इस पर चर्चा है।
किसानों को एमएसपी जैसे मुद्दे भी हैं, मगर यह मुद्दा अभी सिर्फ हल्की चर्चा का केंद्र दिख रहा है। मुलाना के धीन गांव में एक छोटा सा बाजार है। जहां पर आसपास के लोग सामान लेने आते हैं। धीन गांव में स्थित जंजघर में कुछ ग्रामीण चुनावी माहौल पर चर्चा करते दिखे। युवाओं की नजर में उनका सांसद कैसा हो, इसके लिए अलग अपेक्षाएं हैं तो बुजुर्ग चाहते हैं कि उनके गांव की समस्याओं का हल हो। मगर साथ में वह यह भी कहते हैं कि अंबाला लोकसभा में नौ विधानसभाएं आती हैं जो तीन जिलों में हैं। ऐसे में इतने बड़े क्षेत्र में एक जनप्रतिनिधि किस प्रकार से विकास कराएगा यह भी विचार करने योग्य बात है।
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समस्याएं समझने वाला हो प्रतिनिधि



बलबीर सिंह बताते हैं कि सांसद मिलनसार हो। जनता की समस्या को समझकर उसका निवारण कराने वाला हो। सबसे जरूरी बात तो यह है कि सांसद क्षेत्र की समस्या को जानने वाला हो। तभी उन समस्याओं का हल करा पाएगा। अगर कोई सांसद स्थानीय समस्या बारे ज्ञान ही न रखता हो तो वह कैसे समस्या हल करा पाएगा। हमारे पास तो कोई ऐसा सिस्टम तो हाेना चाहिए जिससे यह पता चल सके कि कौन सा जनप्रतिनिधि आपके क्षेत्र की समस्याओं को अधिक जानता है। इसी प्रकार काका सैनी कह रहे थे कि लोकसभा में अपने क्षेत्र की आवाज उठाने वाला सांसद मजबूत होना चाहिए। अभी रोजगार को लेकर लोगों में काफी चिंता है, विद्यार्थी नौकरी की तलाश में पलायन कर रहे हैं, जिन किसानों के खेत हैं उनके बच्चे इस काम को छोड़ रहे हैं।
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वोट लेकर लापता हो जाते हैं नेता जी

सतनाम सिंह बताते हैं कि अकसर देखने में आता है कि सांसद पद के उम्मीदवार चुनावों के समय में हमारे बीच रहते हैं। हर गांव गांव जाकर लोगों से वोट मांगते हैं, लेकिन वोट लेने के बाद लापता हो जाते हैं। देखने को भी नहीं मिलते। किसानों की फसलों और उनके रेट के बारे में भी आने वाली सरकार को सोचना चाहिए। किसान हर साल नुकसान में जा रहा है इसका समाधान सरकार ही निकाल सकती है। इस कारण किसान सरकार की तरफ ही देखता है। इसी प्रकार बलदेव सिंह बताते हैं कि सांसद पढ़ा लिखा हो वह केवल वायदों तक सीमित न रहकर धरातल पर भी कार्य कराने में विश्वास रखता हो। लोकसभा के ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी विकास की दरकार है जिसे की जनता चुने वह ग्रामीण क्षेत्र में कार्य करना प्राथमिकता पर रहे तब तो कुछ गांव के लोगों का भला होगा।
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