नारायणगढ़। इफको ने शुक्रवार को नन्हेड़ा गांव में वृहद किसान गोष्ठी का आयोजन किया। इसमें नैनो यूरिया तरल उपयोग के बारे में किसानों को जागरूक किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. पुष्पेन्द्र वर्मा, राज्य विपणन प्रबंधक, इफको हरियाणा ने की। कार्यक्रम में विभिन्न गांवों से 150 से अधिक प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। डॉ. पुष्पेन्द्र वर्मा ने कहा कि हमें अपने प्राकृतिक संसाधन पानी और मिट्टी को सुरक्षित रखने की आवश्यकता है जोकि खेती का मुख्य आधार है। धान-गेहूं के फसल चक्र में किसान खादों का असंतुलित प्रयोग कर रहे हैं। इसमें यूरिया का प्रयोग आवश्यकता से अधिक हो रहा है। इससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति में कमी आई है व भूमिगत पानी में भी नाइट्रेट की मात्रा बढ़ी है।
यूरिया के कुप्रभावों को देखते हुए इफको ने नैनो यूरिया तरल विकसित किया है। इसके प्रयोग से खेती में दानेदार यूरिया के प्रयोग को 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। इसकी आधा लीटर मात्रा का 125 लीटर पानी में मिलाकर पहला स्प्रे फसल के फुटाव की अवस्था पर व दूसरा स्प्रे निसारे से एक सप्ताह पहले करने से फसल की नाइट्रोजन की पूर्ति होने के साथ-साथ पैदावार में भी बढ़ोतरी होती है। इसकी कीमत 240 रुपये प्रति बोतल रखा गया है जो यूरिया के बोरे से 10 प्रतिशत कम है। गोष्ठी में डॉ. वीरेन्द्र सिंह, जिला उद्यान अधिकारी अंबाला मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे।
पानी बचाने की सलाह
सरकार द्वारा खेती में उपयोग होने वाले पानी को बचाने के लिए मेरा पानी-मेरी विरासत योजना लागू की है। इसका लाभ लेने के लिए विभाग की वेबसाइट पर पंजीकरण करना आवश्यक है। उन्होंने फसलों में कीटनाशकों का प्रयोग विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार करने की सलाह दी। ओमकार सिंह, उप महा प्रबंधक इफको चंडीगढ़ ने पानी में घुलनशील उर्वरकों के महत्व पर जानकारी दी। इस दौरान अन्य सदस्यों ने भी इस संबंध में विभिन्न जानकारी दी।