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नाबालिग ने खुद किया फोन : जबरदस्ती ले जा रहे ससुर

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अंबाला सिटी। नाबालिग ने स्वयं ही जिला युवा विकास संगठन की ओर से संचालित चाइल्ड लाइन अंबाला को फोन कर सूचना दी की उसे जबरदस्ती ससुराल भेजा जा रहा है। सूचना मिलने पर इसकी चाइल्ड लाइन की ओर से बाल कल्याण समिति चेयरपर्सन रंजीता सचदेवा को दी। इसके बाद चेयरपर्सन की ओर से बच्ची को रेस्कयू करने के निर्देश किए।
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चाइल्ड लाइन डायरेक्टर परमजीत सिंह बडौला के निर्देश पर कोऑर्डिनेटर अजय तिवारी और टीम सदस्य चंचल सदर थाना पहुंचे, जहां से पुलिस टीम के साथ बच्ची के घर गए, बच्ची के घर जाकर पता लगा कि बच्ची को उसकी माता 10 मिनट पहले ही लेकर जा चुकी है और छह बजे की ट्रेन से वो चले जाएंगे।
टीम केवल पांच मिनट के अंदर बच्ची के घर से तुरंत अंबाला शहर रेलवे स्टेशन के लिए रवाना हुई जहां पर तलाश के दौरान बच्ची अपनी मां व अपने ससुर के साथ रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म नंबर एक पर पाई गई, बच्ची काफी घबराई हुई थी। टीम द्वारा बच्ची को अपने सरंक्षण में लिया गया बच्ची व उसकी मां और ससुर को लेकर सदर थाना पहुंचे। जहां टीम द्वारा बच्ची से बातचीत की गई, इस दौरान बच्ची ने बताया कि वह बिहार की रहने वाली है और अपने माता पिता के साथ किराए के मकान में अंबाला शहर में रहती है। उसकी नानी व माता-पिता ने मिलकर जबरन उसका विवाह 02 मार्च 2023 को बिहार में उसकी मासी के लड़के के साथ करवा दिया था। उसकी उम्र 25 वर्ष थी और वह पहले से विवाहित था, बच्ची ने बताया कि जिस लड़के के साथ उसका विवाह हुआ था उसने उसका शारीरिक व मानसिक शोषण किया था।
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बच्ची ने बताया कि विवाह के 15 दिन बाद उसको अंबाला ले आए थे और दिनांक 22 अप्रैल को ईद पर उसका पति उसको लेने आया था उसके साथ जाने से मना कर दिया जिस पर उसकी मां ने उसे बहुत मारा था, परन्तु फिर ससुर उसे लेने आए और उसकी मां जबरदस्ती उनके साथ ससुराल पंजाब में भेज रही थी। बच्ची ने कहा कि वह ससुराल नहीं जाना चाहती है इस समय वह कक्षा 08 में पढ़ रही है और आगे भी पढ़ाई करना चाहती है। चाइल्ड लाइन टीम द्वारा बच्ची को भावनात्मक सहारा देते हुए समझाया कि यदि वह आगे पढ़ना चाहती है तो चाइल्ड लाइन अंबाला उसकी हर संभव मदद करेगी। जिसके बाद चाइल्डलाइन टीम द्वारा बच्ची के साथ हुए शारीरिक शोषण को देखते हुए पॉक्सो एक्ट के तहत जीरो एफआईआर करवाकर बच्ची की मेडिकल जांच पुलिस की ओर से सिविल अस्पताल अंबाला से कराई। इसके बाद बाल कल्याण समिति के निर्देश पर सुरक्षित हालत में बच्ची को वन स्टॉप सेंटर अंबाला में छोड़ दिया गया।
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