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स्कूल पर जड़ा ताला, ग्रामीणों का हंगामा

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नारायणगढ़। बड़ागांव के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से गणित विषय के दो पद समाप्त किए जाने के विरोध में ग्रामीण भड़क उठे। ग्रामीणों ने मंगलवार सुबह स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया। ताला लगाने से पूर्व ग्रामीणों ने स्कूल के अंदर से बच्चों व शिक्षकों को बाहर निकाल दिया। लगभग दो घंटे तक स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला लगाए रखा। सूचना मिलने पर मौके पर खंड शिक्षा अधिकारी नारायणगढ़ राकेश कुमार, तहसीलदार दिनेश ढिल्लो और नायब तहसीलदार संजीव अत्री पहुंचे। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी से बात करने के उपरांत ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि आगामी 15 दिनों के अंदर एक पद पर अध्यापक भेज दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त और भी दो अन्य अध्यापक भेजें जाएंगे।
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ग्रामीणों ने बताया कि इतने बड़े स्कूल में साइंस, अंग्रेजी का कोई शिक्षक नहीं है। इसके अतिरिक्त कोई पीटीआई भी नहीं है। ग्रामीण परमाल सिंह का कहना है कि स्कूल में चपरासी व चौकीदार भी नहीं हैं। बच्चों से पैसा एकत्रित कर अस्थाई तौर पर काम करने वाला एक चपरासी रखा हुआ है। ग्रामीणों ने ज्ञापन सौंपकर गुहार लगाई कि उनके विद्यालय में शिक्षा के क्षेत्र में सुधार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि रिक्त पड़े पदों पर अध्यापकों को शीघ्र अति शीघ्र नियुक्त करना चाहिये।
1905 में बना था स्कूल
धरने पर बैठे ग्रामीणों का कहना था कि सरकार की यह पॉलिसी बिल्कुल गलत है। उनके गांव में 1905 में स्कूल बना था। यहां हर विषय के छात्र पढ़ते हैं। विद्यालय में कुल 475 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आते हैं जो दूर-दराज के करीब 15 गांवों से आते हैं। सोमवार को प्रधानाचार्य ने एसएमसी की मीटिंग बुलाई तो उन्हें पता चला कि स्कूल में से गणित विषय के दो पद समाप्त कर दिए गए हैं। जब स्कूल में से मुख्य विषयों के अध्यापकों के पद ही समाप्त कर जाएंगे तो स्कूल के बने रहने का क्या औचित्य है।
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वर्षों से शानदार आ रहा परिणाम
गांव के पूर्व सरपंच रणधीर सिंह, प्रमाल सिंह, फतेह सिंह, लाल चंद नंबरदार, मामराज, तरसेम सिंह, सूबे सिंह, लाभ सिंह, सोमनाथ, विजय कुमार, निशान सिंह, टीटू राणा और लाल सिंह ने बताया कि उन्होंने मंत्रियों और सांसदों से संपर्क किया, परंतु फिर भी कोई बात नहीं बनी। उन्होंने बताया कि स्कूल का रिजल्ट पिछले काफी वर्षों से अच्छा आ रहा है। उनकी मांग है कि स्कूल में अध्यापकों की संख्या बढ़ाई जाए। स्कूल की एसएमसी कमेटी के प्रधान लाल चंद का कहना था कि उन्हें यह विश्वास था कि कुछ अध्यापकों का तबादला हुआ है और उनकी जगह दूसरे शिक्षक आ जाएंगे। गणित विषयों के शिक्षकों के बिना उनके स्कूल के नॉन मेडिकल और आर्ट के बच्चे कैसे पढ़ेंगे।
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