अंबाला सिटी के मां महाकाली दुखभंजनी मंदिर हाल में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में प्रवचन करते कथा
अंबाला सिटी। दुख संकट की विपरीत परिस्थितियों में सगे संबंधी रिश्तेदार अजनबी की तरह व्यवहार करने लगते हैं, मगर एक सच्चा मित्र ही ऐसा होता है, जो विपरीत परिस्थितियों में साथ दे।
अपने मित्र पर आए दुख संकटों को वह बड़ी ही खुशी के साथ अपनाने के लिए हमेशा तत्पर रहने वाले को ही वास्तव में परममित्र कहा जाता है। उपरोक्त शब्द अंबाला सिटी के मां महाकाली दुखभंजनी मंदिर के हाल में चल रही आठवीं संगीतमयी श्रीमद् भागवत कथा के दौरान वृंदावन से पधारे कथा व्यास आचार्य पंडित मुकेश भारद्वाज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहे, वहीं कथा व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता पर विशेष प्रसंग सुनाया।
इसमें बताया गया कि कथित गरीबी के दौर से गुजर रहे भगवान श्रीकृष्ण के परममित्र भक्त सुदामा, जब वह भगवान श्रीकृष्ण के द्वार पर पहुंचते हैं, तो भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मित्र सुदामा का बड़ी ही खुशी के साथ शिष्टाचार कर, उनको बिना मांगे हर प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध करवाई। जिससे भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी मित्रता का परिचय दिया। इस युग में जब भी किसी इंसान पर दुख संकट आ जाए, तो सबसे पहले उसके अपने सगे संबंधी नाता तोड़ लेते हैं।
इसलिए जब भी किसी पर दुख संकट छा जाए तो भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा दिखाए गए मार्गदर्शन पर चलते हुए हमेशा एक दूसरे की मदद जरूर करनी चाहिए। कथा के समापन पर आप और हम भागवत सेवा मंडल के प्रधान हर्ष सोनू सेठी व मंडल के सभी पदाधिकारियों ने परिवार सहित पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण के दरबार में आयोजित विशेष आरती में भाग लिया।
अंबाला सिटी के मां महाकाली दुखभंजनी मंदिर हाल में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में प्रवचन करते कथा