शंभू बॉर्डर पर आंसू गैस के गोले से बचकर दौड़ लगाते हुए किसान: अंशु शर्मा
हरियाणा पंजाब को जोड़ने वाली शंभू सीमा की हवा 13 फरवरी से जहरीली हो गई है। हालात यह हैं कि सीमा पर खड़े होने मात्र से लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। इसके साथ ही आंखों में जलन और नाक में एलर्जी जैसी महसूस हो रही है। इससे लोगों का बिना मास्क और चश्मे में टिकना मुश्किल हो रहा है।
खासकर शंभू सीमा पर जिस स्थान पर आंसू गैस के गोले गिरे हैं उस क्षेत्र में ऐसी स्थिति है। ऐसे में लोग कुछ देर तो वहां खड़े होकर सीमा पर तनाव को देखते हैं, मगर बाद में उन्हें पीछे हटना पड़ता है, क्याेंकि उनके लिए वहां पर लगातार खड़े होना काफी मुश्किल हो जाता है। किसानों के अंबाला की सीमा पर पहुंचने तक चार दिन बीत चुके हैं। चौथे दिन भी आंसू गैस के गोलों का प्रयोग भीड़ को तितर बितर करने के लिए किया गया। ऐसे में सीमा पर हवा कब साफ होगी इसके बारे में कोई तारीख तय नहीं हो पा रही है।
हर तरफ गैस के गोलों के खोल और पत्थर
शंभू सीमा के हालात संघर्ष की दास्तां बयां करते दिखाई दे रहे हैं। यहां पर बैरिकेडिंग से पंजाब तक घग्गर के पुलिस और मुख्य राजमार्ग पर पत्थर बिखरे हैं। जो पथराव की स्थिति को दर्शा रहे हैं। सिर्फ पत्थर ही नहीं बल्कि इस संघर्ष में भगदड़ मचने पर प्रदर्शनकारियों के पैरों से उतरे जूते, फटे कपड़े, बोरियां भी साफ देखी जा सकती हैं। जो यह बता रही हैं कि बीते दिनों में काफी संघर्ष हुआ है। 13 और 14 फरवरी को इतनी गोलोबारी है कि एनएचएआई का साइन बोर्ड भी पंजाब की तरफ से पूरी तरह से तहस नहस हो रखे हैं। इसके साथ ही आंसू गैस के चले हुए गोलों के खोल भी यहां बिखरे हैं।
बुजुर्गों के लिए परेशानी
किसान आंदोलन में आंसू गैस के गोले के संपर्क में आने से कहा जा रहा है कि एक किसान की मौत हो गई है। जोकि 63 वर्ष की उम्र का था। ऐसे कई बुजुर्ग किसान हैं जो सीमा पर हाल जानने ट्रैक्टर ट्रालियों से निकलकर आ रहे हैं, ऐसे में यहां पर अगर फायरिंग होती है तो उनके लिए भागना भी मुश्किल हो रहा है। फिर आंसू गैस के गोलों की दुर्गंध से उनका सांस लेना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में अगर इसी प्रकार प्रदर्शनकारी प्रदर्शन करते हुए तो बुजुर्ग किसानों के लिए राह कठिन हो सकती है। सिर्फ बुजुर्ग किसान ही नहीं, बल्कि आसपास के गांव के लोग भी इस दुर्गंध को महसूस कर पा रहे हैं।