फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ambala News: हरियाणा-पंजाब सीमा बंद होने से कपड़ा मार्केट काे फटका

विज्ञापन
विज्ञापन
अंबाला सिटी। हरियाणा पंजाब सीमा बंद होने से अंबाला के कपड़ा व्यापारियों का व्यापार काफी हद तक प्रभावित हुआ है। इस बार शादियों के सीजन में भी व्यापारियों की दुकानें दो माह से खाली हैं। व्यापारियों का कहना है कि उनकी 40 प्रतिशत बिक्री पंजाब से आने वाले ग्राहकों से होती है लेकिन पंजाब की सीमा बंद होने से लोग खरीदारी के लिए नहीं पहुंच रहे हैं। सिर्फ कपड़ा मार्केट ही नहीं बल्कि मनियारी बाजार में भी कॉस्मेटिक का काम करने वाले थोक दुकानदारों का भी बुरा हाल है। इस आधार पर दोनों बाजारों में व्यापारियों को हर माह करोड़ों रुपये का फटका लग रहा है। अब अंबाला की होलसेल कपड़ा मार्केट एसोसिएशन ने राज्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने गुहार लगाई है कि वह संज्ञान लें और हरियाणा पंजाब की सीमा को जोड़ने वाली शंभू सीमा को खुलवाएं ताकि वह नुकसान से बच सकें।
विज्ञापन

जानकारी के अनुसार अंबाला शहर की कपड़ा मार्केट में शादियों के समय बाजार से वाहन गुजरना भी मुश्किल होता है लेकिन अब बाजार सुनसान पड़े हैं। किसान आंदोलन के चलते अंबाला हरियाणा को जाेड़ने वाला शंभू बॉर्डर पिछले दो महीने से बंद है। अब अगर पंजाब के लोगों को हरियाणा में दाखिल भी होना है तो उन्हें काफी लंबा चक्कर लगाकर आना पड़ रहा है। अंबाला शहर में स्थित होलसेल कपड़ा मार्केट कई राज्यों के ग्राहकों के लिए पसंदीदा बाजार है। यहां पर हरियाणा ही नहीं बल्कि पंजाब, जम्मू कश्मीर, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली सहित अन्य राज्यों से लोग भारी मात्रा में कपड़ा खरीदने आते हैं। यहां पर कई राज्यों से व्यापारी भी आते हैं और अपने-अपने प्रतिष्ठानों के लिए कपड़ा ले जाते हैं। अब पंजाब की तरफ से थोक व्यापारी अंबाला कपड़ा मार्केट नहीं आ पा रहे हैं ऐसे में व्यापारी भी नुकसान को कम करने के लिए सीमित सामान मंगा रहे हैं।



अंबाला के साथ लगते पंजाब के जिलों से व्यापार हुआ शून्य

होलसेल कपड़ा मार्केट एसोसिएशन के प्रधान विशाल बत्रा बताते हैं कि अंबाला के साथ लगते पंजाब के राजपुरा, पटियाला, सरहिंद आदि स्थानों से बड़े होलसेल व्यापारी उनके बाजार में खरीददारी करने आते थे। बीते दो महीनों से वह आ ही नहीं पा रहे हैं। व्यापारियों ने अपनी दुकानों पर चार से पांच या इससे अधिक कर्मचारियों को भी रखा है ऐसे में समझ नहीं आ रहा कि अब खर्चा निकालें तो कहां से निकालें। क्योंकि सभी से कह लिया मगर इस समस्या का समाधान नहीं निकल पा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें