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Ambala News: होलिका दहन पर लें बुराई जलाने का संकल्प

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अंबाला सिटी। प्रतिवर्ष की भांति इस बार भी होली का त्योहार मनाया जाएगा। इस त्योहार को बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी उत्साह के मनाते हैं। महिलाएं बड़ी ही श्रद्धापूर्वक होलिका पूजन के कार्यक्रम में भाग लेती हैं। इस बार होलिका पूजन का कार्यक्रम 24 मार्च को रहेगा। उसके अगले दिन रंगों की होली खेली जाएगी।
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होलिका पूजन करने के लिए सिटी के पं. दिनेश शास्त्री, पं. विशाल शास्त्री, पं. रोहित कृष्ण शास्त्री, पं. रिंकू शास्त्री, संजीव मोदगिल और पं. कन्हैया लाल ने बताया कि होली पूजन का विशेष महत्व होता है। होलिका दहन करने से निकलने वाली पवित्र अग्नि की गर्मी और धुएं से पूरे वातावरण से नकारात्मक ऊर्जा जल जाती है। होलिका दहन के दिन ही सभी भक्तों को यह भी संकल्प लेना चाहिए कि अपनी सभी बुराइयों का त्याग कर अच्छाइयों की ओर बढ़कर एक नई शुरुआत करें।
सही मुहूर्त पर पूजन से मिलेगी संकट से मुक्ति
सिटी सिविल अस्पताल मंदिर के पुजारी देवी प्रसाद भारद्वाज ने बताया कि आगामी 24 को फाल्गुन पूर्णिमा पर होलिका दहन और चैत्र माह की प्रतिपदा तिथि पर रंगो वाली होली मनाई जाएगी। इस बार होली पर कई शुभ संयोग और ग्रह नक्षत्र का खास स्थितियां बन रही है। होली पूजन का कार्य सही शुभमुहूर्त पर किया जाए तो भक्तों को सभी दुख संकटों से मुक्ति की प्राप्ति होगाी।
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भद्रा रहित रहेगा होलिका दहन का शुभमुहूर्त
सिटी शर्मा कॉलोनी निवासी पं. धर्मपाल शास्त्री ने बताया कि होलिका दहन रविवार के दिन किया जाएगा। इस बार होलिका दहन का शुभमुहूर्त भद्रा रहित रहेगा। जिसका शुभमुहूर्त रात्रि 11 बजकर 13 मिनट से देर रात्रि 12 बजकर 7 मिनट तक रहेगा, वहीं भक्तों को चाहिए कि होलिका दहन से पहले प्रदोष काल में हाली की पूजा को करना उचित रहेगा। होलिका की पूजा शाम 6 बजकर 35 मिनट से रात 9 बजकर 31 मिनट तक भी कर सकते हैं।
पूजन करने के बाद करें होलिका परिक्रमा
सिटी जगाधरी गेट निवासी पं. अमित कालिया ने बताया कि होलिका पूजन से पूर्व भगवान नृसिंह और फिर भक्त प्रहलाद का ध्यान करके उन्हें चंदन, अक्षत और फूल आदि अर्पित करने पश्चात होली की पूजा करें। होलिका पर जल अर्पित करते हुए हल्दी, कुमकुम, अक्षत अर्पित कर 7 प्रकार के पकवान चढ़ाकर 5 या 7 परिक्रमा लगाएं। ऐसा करने से विशेष आशीर्वाद की प्राप्ति होगी।
ओम: नमों: भगवते: वाशुदेवाय: कर करें जाप
गांव ठरवा माजरी निवासी आचार्या प्रवीन शास्त्री ने बताया कि होली पर्व शक्ति पर भक्ति की जीत की ख़ुशी में मनाया जाता है। हिन्दू ग्र्रंथों में बताया गया है कि एक बार हिरण्यकश्यप की बहन होलिका भक्त प्रह्लाद को मारने के लिए वह वस्त्र पहनकर उन्हें गोद में लेकर आग में बैठ गई। भक्त प्रह्लाद ने ओम: नम: भगवते: वाशुदेवाय: का मंत्र जाप किया और विष्णु भक्ति के फलस्वरूप होलिका जल गई और भक्त प्रह्लाद पूरी तरह से सुरक्षित रहे। उसी समय से होलिका दहन मनाने की परंपरा की शुरूआत हुई।
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