अंबाला। महेश नगर थाना क्षेत्र स्थित बब्याल से नौवीं कक्षा की दो छात्रों के अपहरण की झूठी कहानी ने पुलिस ने पसीने छुड़ा दिए। करीब छह घंटे तक मामले की गंभीरता से जांच के बाद पता लगा कि मामला झूठा था। दोनों छात्राएं जिस अध्यापिका की नाबालिग बेटी पर अपहरण कर कमरे में बंद करने के आरोप लगा रही थी वो आपस में मिली थी।
तीनों मर्जी से तोपखाना स्थित अध्यापिका के घर गई थी और वहां से केदारनाथ जाने की तैयारी थी। जैसे ही घर में काम कर रहे मिस्त्री ने उन्हें स्कूल ड्रेस और बाद में सिंपल कपड़ों में देखा तो उसने उन्हें रोकने का प्रयास किया। इस दौरान ही वह कमरे में बंद हो गई थी। उधर, मामले की एक के बाद एक परतें खुलते ही परिजनों ने भी थाने में किसी के खिलाफ कोई शिकायत नहीं दी और छात्राओं को लेकर अपने घर चले गए। महेश नगर थाना प्रभारी रामपाल ने बताया कि उनके पास लिखित में शिकायत आती है तो कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
फोन पर सुनाई थी अपहरण की कहानी
दरअसल, दोनों छात्राएं स्कूल जाने के लिए मंगलवार सुबह अपने घर से निकली थी। पहले उनका आरोप था कि स्कूल अध्यापिका की ही लड़की उन्हें दुकान पर मिली थी और एक्टिवा पर अपने घर तोपखाना ले गई थी। वहां पर उसके जबरन कमरे में ले जाकर उन्हें कपड़े बदलने के लिए बोला और कहा कि केदारनाथ चलना है। ऐसे में मना करने पर कमरे में बंद कर दिया था। जैसे-तैसे वह खिड़की के जरिए भागी और वहां से कूदते समय चोटिल हो गई थी। जैसे-तैसे वह भागकर एक दुकान पर पहुंची और फोन से परिजनों को बोला कि उनका अध्यापिका की बेटी ने अपहरण कर लिया है। इस दौरान पुलिस ने दोनों छात्राओं को उपचार के लिए छावनी नागरिक अस्पताल में दाखिल करवाया था, जहां पर काफी हंगामा भी हुआ था।
पंजोखरा और महेश नगर दोनों पुलिस पहुंच गई थी और गुस्साए परिजनों ने रोष जताया था। आखिर में गहनता से पूछताछ करने के बाद पूरा मामला बदल गया। छात्राएं एक के बाद एक बयान बदलती रही। बाद में सामने आया कि तीनों छात्राएं एक साथ तोपखाना बाजार स्थित घर में गई थी। वहां पर लगे राजमिस्त्री ने स्कूल ड्रेस में देखकर उन्हें टोक दिया था। उसे शक हुआ था और इसलिए कमरे का बाहर से कुंडा लगाया था कि परिजनों को बुला सके। इतने में छात्राएं वहां से भाग गई।