अंबाला सिटी। 1962 में बने शहर के वीटा मिल्क प्लांट के यहां से शिफ्टिंग की जानी है। हालांकि, यह प्रक्रिया नए उपायुक्त के आने के बाद से तेज हो गई है। अभी शिफ्टिंग के लिए जगह देखी ही जा रही थी। द अंबाला जिला कॉरपोरेटिव मिल्क प्रोड्यूर्स यूनियन ने सुझाव दिया है कि वीटा मिल्क प्लांट को शिफ्ट करते समय दुग्ध उत्पादकों के हित को देखा जाए। यूनियन ने मैनेजिंग डायरेक्टर हरियाणा डायरी पंचकूला को पत्र देकर गांव गोला में 16 एकड़, गांव धनौरा में 17 एकड़ जमीन की ऑफर की है। उन्होंने यह भी मांग की कि प्लांट डेयरी शिफ्टिंग प्रक्रिया में हरियाणा डेयरी के चेयरमैन व दुग्ध संघ अंबाला के चेयरमैन को शामिल किया जाए। उन्होंने सरकार से पोर्टल खोलने की मांग भी की ताकि कम रेट वाली जमीन की जानकारी चढ़ाई जा सके।
वीटा मिल्क प्लांट को अंबाला, यमुनानगर और पंचकूला के दुग्ध उत्पादक किसान करीब 699 समितियों के माध्यम से दूध देते हैं। तीनों जिलों को देखते हुए ही जमीन चिह्नित की जानी चाहिए।
बीते शनिवार को उपायुक्त डॉ. शालीन ने संबंधित अधिकारियों के साथ अम्बाला-हिसार रोड पर गांव मणका के पास और शहजादपुर ब्लॉक के तहत गांव तसड़ौली में प्रस्तावित जगह का जायजा लिया था। इस दौरान उन्होंने जमीन की फिजिबिल्टी, लोकेशन, जमीन का रेट और अन्य बिंदुओं के बारे में संबंधित अधिकारियों से जानकारी हासिल की थी।
द अंबाला डिस्टिक्ट कॉरपोरेटिव मिल्क प्रोड्यूर्स यूनियन लिमिटेड अंबाला के चेयरमैन जयपाल ने बताया कि वैसे तो जहां अभी वीटा मिल्क प्लांट हैं, ऐसी जगह मिलनी मुश्किल है। इसकी दोनों तरफ हाईवे लगता है। जयपाल ने बताया कि यूनियन शिफ्टिंग प्रक्रिया को लेकर सहकारिता मंत्री बनवारी लाल व प्रबंध निदेशक को मिली थी। यूनियन ने पत्र देकर बताया है कि अगर प्लांट को यहां से शिफ्ट किया जाना है तो प्लांट को पंचकूला, यमुनानगर, अंबाला तीनों जिलों के मध्य स्थापित किया जाए। जमीन का रेट कम हो ताकि सरकार और प्रसंघ के पैसों को बचाया जा सके।
वीटा में 1 लाख 10 हजार लीटर रोजाना आ रहा दूध
वीटा मिल्क प्लांट में अंबाला, पंचकुला, यमुनानगर जिलों से रोजाना करीब एक लाख 10 लीटर दूध रोजाना आ रहा है। यह दूध सोसाइटी के माध्यम से वीटा में पहुंचता है। वीटा इन सोसाइटी को दूध का भुगतान करता है। वीटा प्लांट में पैसूराईजर प्लांट, एयर लॉक एरिया, पनीर मैन्युफैक्चरी सेक्शन, दही पैकिंग सेक्शन व क्षमता के मुताबिक दूध को गरम करने वाले स्थान व ठंडा करने वाले स्थान हैं। यहां से दूध, दही व पनीर के साथ-साथ अन्य उत्पाद की डिमांड व सप्लाई रहती है। प्लांट से चंडीगढ़, पंचकूला, कांगड़ा, काला अम्ब आदि अन्य क्षेत्रों में दूध, दही व पनीर व बोतल वाले दूध की सप्लाई रहती है। यहां 10 हजार क्षमता वाले पांच टैंक स्थापित है, जिनमें दूध उत्पाद से संबंधित गतिविधियां की जाती हैं। साथ ही पनीर मैन्यूफैक्चरी सैक्शन, दही पैकिंग सैक्शन भी हैं।
उनका हरियाणा सरकार से आग्रह है कि कुछ लोगों की न मानकर कर्नाटक की नंदिनी व अमूल के पैटर्न पर काम किया जाए। यूनियन के अधिकारों में दखलअंदाजी न की जाए। वीटा मिल्क प्लांट को शिफ्ट करने की जरुरत नहीं है, बल्कि सिस्टम में सुधार करने की जरूरत है। बोर्ड डायरेक्टर व किसानों की राय लेकर आगे बढ़ा जाए।
-परमजीत सिंह बड़ौला, बोर्ड डायरेक्टर, द अंबाला जिला कॉरपोरेटिव मिल्क प्रोड्यूर्स यूनियन लिमिटेड अंबाला।
वीटा मिल्क प्लांट के शिफ्टिंग के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। प्रशासनिक उच्चाधिकारी ही इस बारे में कुछ बता सकते हैं।
-सर्बजीत सिंह, सीईओ, वीटा मिल्क प्लांट, अंबाला शहर।