अंबाला सिटी। राजकीय स्कूलों में पहली से पांचवीं कक्षा तक के विद्यार्थी पढ़ने-लिखने में निपुण बनेंगे। राजकीय प्राथमिक पाठशाला में निपुण के तहत खेल-खेल में विद्यार्थियों को पढ़ाया जा रहा है, ताकि बच्चे खेल-खेल में सीख भी सकें। कार्यक्रम में फाउंडेशनल लिटरेसी और न्यूमैरेसी के अंतर्गत भाषा और गणित पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है।
इसी को लेकर बीते दो दिन पंचकूला में सेक्टर-14 के किसान भवन में स्टेट लेवल निपुण हरियाणा के अंतर्गत एफएलएन ओरिएंटेशन कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता एसपीडी व डायरेक्टर सेकेंडरी एजुकेशन अंशज ने की। कार्यशाला में जिला अंबाला से जिला शिक्षा अधिकारी सुरेश कुमार, डीईईओ कम डाइट प्रिंसिपल सुधीर कालड़ा, जिला परियोजना संयोजक रेणू अग्रवाल ने भाग लिया।
निपुण मिशन हरियाणा का उद्देश्य है कि हर स्कूल, हर अध्यापक, हर बच्चा निपुण बन सकें। ग्रेड लेवल दक्षता हासिल कर सकें। जिसमें कक्षा एक से तीन तक और चार से पांच तक की कक्षाओं को शामिल किया गया है। इस दौरान शिक्षक संदर्शिका को किस प्रकार इस्तेमाल किया जाए, कैसे पूरा किया जाए, बच्चों को टीचर वर्क बुक कैसे पूरी करवाएं, कैसे साप्ताहिक कार्य किया जाए, कैसे दैनिक योजना बनाई जाए, कैसे बच्चों का साप्ताहिक मूल्यांकन करके टीचर संदर्शिका में भरा जाए आदि पर भी चर्चा की गई।
अध्यापक को कक्षा में जाने से पहले सोचना होगा, क्या पढ़ाएंगे
दरअसल, टीचर को क्लास में जाने से पहले यह सोचना है कि आज की क्लास में बच्चों को क्या पढ़ाना है, कैसे पढ़ाना है, पढ़ाते समय क्या-क्या गतिविधियां करनी हैं, बच्चों को कैसे सिखाया जाना है और उन्हें कैसे ट्रैक करना है। इसी प्रकार पुस्तक भी लर्निंग प्रोसेस का एक टूल है। दुनिया के सारे बच्चे सबसे कठिन स्किल घर से सीखकर स्कूल में आते हैं। बच्चों को पढ़ाते समय यह ध्यान रखा जाए कि बच्चे को समझ के साथ पढ़ना आना चाहिए। जब एक-एक बच्चा किसी भी अनसीन पैसेज को देखकर एक मिनट में उस पैसेज के कम से कम 45 से 60 शब्दों को लगातार बिना रुके बोल सके, तब हमें समझ लेना चाहिए कि यह बच्चा निपुण बन सकता है। एक टीचर को हमेशा ओरआरएफ यानी ओरल रीडिंग फ्लूंसी पर काम करना चाहिए।