कभी राहगीरों और ग्रामीणों की प्यास बुझाने वाले कुएं आधुनिकता की दौड़ में विलुप्त हो रहे हैं। जो शेष हैं, उन्हें देखने वाला कोई नहीं। ऐसी धरोहरों को बचाने का बीड़ा श्री गुरु ग्रंथ साहिब विद्या केंद्र बहवलपुर ने उठाया है। केंद्र की प्रधान बीबी भूपेंद्र कौर बताती हैं कि 100 साल से भी ज्यादा क्षेत्र में जो पुराने कुएं हैं। उनका लाइफ फाउंडेशन के सहयोग से जीर्णोद्धार करने का काम किया जाएगा। संस्था से जुड़े सरदार जगतार सिंह ने बताया कि बारिश में जब खेतों में पानी भर जाता है तो ऐसे समय में पशु पक्षी कुएं में गिर कर मर जाते हैं।
एक समय था जब यह कुएं लोगों की प्यास बुझाते थे, लेकिन आज यह गंदगी से भरे और वीरान हैं। बहवलपुर में स्वरूप सिंह की ओर से 100 साल पहले लगाए कुएं से संस्था अपने कार्य की शुरुआत करेगी। उन्होंने बताया कि कुएं के किनारे पर लगे हुए वृक्ष को काटकर दोबारा से कुएं को ढका जाएगा। इसे कई बार साफ किया जाएगा और इसके स्रोत को पुनर्जीवित किया जाएगा।
इसके साथ कुएं के ऊपर एक नल भी लगाया जाएगा। इसके पास एक टैंक बना होगा जिसमें संस्था का एक सदस्य पशु पक्षियों के लिए टैंक में पानी की व्यवस्था करेगा। कुएं से थोड़ी दूर छायादार वृक्ष भी लगाए जाएंगे ताकि उसकी जड़े कुएं तक ना जा सकें। इस कार्य को श्री गुरु ग्रंथ साहिब विद्या केंद्र के सचिव डॉ. महान सिंह व लाइफ फाउंडेशन मिलकर पूर्ण कराएगी।
2007 में हुई थी स्थापना
प्रधान भूपेंद्र कौर ने बताया कि लाइफ फाउंडेशन के अध्यक्ष ज्ञानी बाबा ठाकुर सिंह ने 2007 में श्री गुरु ग्रंथ साहिब विद्या केंद्र को स्थापित किया था। तब से यह संस्था उनके दिखाए कदमों पर चलकर समाज की सेवा में तत्पर है। कोरोना काल हो चाहें हाल ही में आई बाढ़ जैसी आपदा, संस्था ने सेवादार, राशन, पानी, दवाएं और फर्नीचर ठीक करने की सेवा भी की।
संस्था के सदस्य मानव सेवा के साथ-साथ बेसहारा लाचार पशु पक्षियों की सेवा में भी हमेशा लगे रहते हैं। उनका कहना है कि गुरु हर राय साहब जी भी हमेशा 20-25 साथियों के साथ जंगलों में जाकर घायल बंदर जैसे अन्य जीवों का उपचार करते थे।