अंबाला। टांगरी में शनिवार को आए 26 हजार क्यूसेक पानी का असर रातभर देखने को मिला। हालात ये थे कि लोगों ने अपने आशियाने छोड़कर टांगरी बांध पर सड़क, मंदिरों और दुकानों में रात गुजारी। इस दौरान उनके माथे पर चिंता की लकीरें और चेहरे पर पसीना रहा।
रातभर लोग जगे रहे कि कहीं जलस्तर न बढ़े। उधर, जलभराव के चलते लोग बिना चूल्हा-चौका के ही बाहर आ गए थे। ऐसे में इन परिवारों की समाजसेवी संस्थाओं ने भूख और प्यास बुझाई। उधर, इलाके के मंदिरों के कपाट भी लोगों की मदद के लिए रातभर खुले रहे और उसमें महिलाओं ने शरण ली। स्थानीय लोगों ने बताया कि पहले ही जलभराव में सबकुछ खत्म हो गया था और अब फिर से ऐसे हालात बन गए। अब तो केवल सरकार से उम्मीद है कि वह मुआवजे के तौर पर कुछ राशि दें, जिससे कि दोबारा से उनका जीवन पटरी पर लौट सके।
न्यू प्रीत नगर में कमर तक पानी
न्यू प्रीत नगर निवासी सुभाष गोपी ने बताया कि शनिवार को नदी उफान पर आने के कारण उसके घर में कमर तक पानी भर गया था। इस कारण वह पत्नी और बच्चों के साथ टांगरी बांध के किनारे एक बंद दुकान के बाहर सोए थे। रातभर परिवार का अलग-अलग सदस्य जगा और पहरा दिया।
घर में चौथी बार आया पानी
प्रदीप ने बताया कि उसके घर में चौथी बार पानी आया है। हर बार वह अपने सामान को बचा लेते थे लेकिन इस बार ज्यादा पानी आने के कारण वह घर के सामान ही नहीं निकाल पाये। इसलिए उनके घर में रखा अधिकतर सामान पानी में डूब गया था। घर से बाहर सोने के अलावा उनके पास कोई चारा नहीं बचा था
मंदिर परिसर में सोए लोग
दिलीप ने बताया कि टांगरी नदी में पानी आने के कारण उसके घर में कमर तक पानी जमा हो गया था और वह परिवार सहित टांगरी बांध पर आ गया था। रात के समय पास में मंदिर का दरवाजा खुलवाकर महिलाओं को परिसर में सुलाया, जिससे कि वह सुरक्षित रह सके।
निर्माणाधीन दुकान में गुजारी रात
न्यू टैगोर गार्डन निवासी राजू ने बताया कि नदी का पानी कॉलोनी से होता हुआ घर में जमा हो गया। इसके बाद वह परिवार को लेकर टांगरी बांध पर निर्माणाधीन दुकान में आये और जैसे-तैसे रात गुजारी, लेकिन अब भूख प्यास सता रही है। केवल समाजसेवी संस्थाओं का ही सहारा है और कोई मदद नहीं मिली।
न्यू प्रीत नगर के लोग जानकारी देते हुए
न्यू प्रीत नगर के लोग जानकारी देते हुए
न्यू प्रीत नगर के लोग जानकारी देते हुए