अंबाला। अयोध्या श्री राम मंदिर में 22 जनवरी को श्री रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। इसके लिए लोगों को अक्षत देकर न्योता दिया जा रहा है, लेकिन यहां ज्यादातर लोग इस बात को लेकर असमंजस है कि आखिर श्रीराम मंदिर से अक्षत के रूप में आए चावलों का क्या करें। किन शुभ कामों में इन अक्षत चावलों का प्रयोग किया जा सकता है।
इस पर पं सतीश शांडिल्य बताते हैं कि भारतीय परंपरा के अनुसार प्राचीन काल में लोग एक-दूसरे को किसी उत्सव या कार्यक्रम का न्यौता देने के लिए अक्षत का उपयोग करते थे। अक्षत यानि चावल देकर लोगों को निमंत्रण भेजा जाता था।इसके लिए हल्दी में रंगे हुए पीले चावलों का उपयोग किया जाता था। हिंदू धर्म में अक्षत का विशेष स्थान है और कोई भी पूजा-पाठ, अनुष्ठान या धार्मिक कार्य अक्षत के बिना पूरा नहीं होता। वह इन अक्षतों को तिजोरी में, प्रसाद बनाकर, मस्तक पर तिलक कर, बेटी के कन्यादान आदि में प्रयोग कर सकते हैं।
तिजोरी में रखें अक्षत
ज्योतिषी सतीश शांडिल्य बताते हैं कि, चावल शुक्र ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए शुक्र ग्रह से धन वैभव लक्ष्मी समस्त भौतिक सुख सुविधाएं प्राप्त होती है। इसका लाभ लेने के लिए चावल को लाल रेशमी कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी में रखना चाहिए। ऐसा करने से मंगल और चंद्र दोनों सक्रिय होकर लक्ष्मी योग का निर्माण करेंगे। इससे घर में खुशियां आएंगी।
खीर का प्रसाद बनाएं
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, श्री राम मंदिर से मिले चावलों का बहुत महत्व होता है, इसलिए श्री रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के दिन इन चावलों से खीर बनाई जा सकती है। इसके बाद इस खीर को परिवार के साथ प्रसाद के रूप में ग्रहण करें और दूसरों में भी बांटें। ऐसा करने से घर में समृद्धि बनी रहेगी।
मस्तक पर तिलक करें
श्री रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के लिए न्यौता में मिले चावलों का विशेष महत्व है। ये शुभता के भी निशानी माने जाते हैं। इसलिए जब भी आप शुभ कार्य के लिए घर से निकल रहे हैं तो इन चावलों को तिलक के रूप में मस्तक पर लगा सकते हैं. ऐसा करने से कोई भी कार्य आसानी से बन जाता है।
बेटी का कन्या दान करें
सनातन धर्म के मुताबिक, धार्मिक दृष्टिकोण से अक्षत का विशेष महत्व होता है। इसलिए इन चावलों को पूजा-पाठ में उपयोग किया जाता है। इसके अलावा जिन लड़कियों की हाल में शादी होनी है उनके पिता उन्हें सौभाग्य के रूप में श्री राम मंदिर से आए चावलों से कन्या दान कर सकते हैं। ऐसा करने से जिस घर में बेटी जाएगी, वहां बरकत होने लगेगी।